Aam Aadmi Party Victory in Punjab: पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने सूबे की सियासत में हलचल तेज कर दी है. इन चुनावों में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया है. राज्य के कुल 104 निकायों में से आम आदमी पार्टी ने 56 पर ऐतिहासिक जीत हासिल कर जमीनी स्तर पर अपनी मजबूत पकड़ साबित की है. वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस 24, शिरोमणि अकाली दल (SAD) 12 और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सिर्फ 6 निकायों तक सिमट कर रह गई है.
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8 नगर निगमों में से 5 पर 'झाड़ू' का कब्जा
निकाय चुनाव के आंकड़ों को देखें तो शहरी इलाकों में भी आम आदमी पार्टी का दबदबा साफ नजर आया. सूबे के 8 बड़े नगर निगमों में से 5 पर 'AAP' ने अपना परचम लहराया है. पार्टी ने बरनाला, मोहाली, मोगा, बठिंडा और बटाला नगर निगम में बड़ी जीत दर्ज की. दूसरी तरफ, दिग्गज नेताओं वाली कांग्रेस पार्टी को केवल कपूरथला नगर निगम से संतोष करना पड़ा, जबकि भाजपा के खाते में पठानकोट और अबोहर नगर निगम आए.
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मान सरकार का जादू चलता दिखा
नगर परिषदों और पंचायतों के मामले में भी मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई वाली सरकार का जादू चलता दिखा. राज्य की 75 नगर परिषदों में से 40 पर आम आदमी पार्टी ने कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस 18 और अकाली दल 10 पर ही रुक गई. इसके अलावा, 20 नगर पंचायतों में से 11 पर आप, 5 पर कांग्रेस, 2 पर अकाली दल और 1 पर भाजपा को जीत मिली. वार्ड स्तर की बात करें तो कुल 1,977 वार्डों में से आप ने 925 वार्डों में जीत और बढ़त का परचम लहराया है. इसके मुकाबले कांग्रेस को 373, अकाली दल को 178 और भाजपा को 167 वार्ड ही मिल सके.
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2027 के विधानसभा चुनाव पर क्या होगा असर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नतीजों ने साल 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव का रुख तय कर दिया है. आम आदमी पार्टी इन नतीजों को अपनी सरकार के काम पर जनता की अंतिम मुहर के रूप में पेश करेगी, जिससे उनका मनोबल सातवें आसमान पर होगा. वहीं दूसरी ओर, करारी हार के बाद अब कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा को अपनी चुनावी रणनीति और संगठन को नए सिरे से खड़ा करना होगा, वरना आगामी विधानसभा चुनाव में उनके लिए राह बेहद मुश्किल होने वाली है.
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