पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मिले 2.87 लाख करोड़ रुपये के डिविडेंड को राज्यों के साथ साझा न करने के फैसले की कड़ी आलोचना की है. चीमा का कहना है कि इस फैसले से पंजाब की स्कूलों, अस्पतालों, ग्रामीण विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन जुटाने की क्षमता प्रभावित होगी.
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पंजाब के लिए इसका क्या है महत्व?
राज्य का बजट कर्मचारियों के वेतन, स्वास्थ्य केंद्रों, स्थानीय सड़कों, बिजली सब्सिडी और किसानों के समर्थन से जुड़े कार्यक्रमों पर खर्च होता है. पंजाब पहले से ही भारी नियमित खर्चों और महामारी के बाद राजस्व दबाव का सामना कर रहा है. चीमा का तर्क है कि यदि 2.87 लाख करोड़ रुपये में से थोड़ी भी राशि राज्यों के साथ साझा की जाती, तो पंजाब अधूरी विकास परियोजनाओं को पूरा कर सकता था, स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च बढ़ा सकता था और कर्ज लेने की जरूरत कम हो जाती.
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राज्यों का कहना है कि हिस्सेदारी क्यों जरूरी है?
RBI से मिला यह डिविडेंड केंद्र सरकार को मिला एकमुश्त वित्तीय लाभ है. कई राज्यों का मानना है कि इस तरह की विशेष आय को सामान्य केंद्रीय राजस्व से अलग तरीके से देखा जाना चाहिए और इसे साझा करने के लिए सहयोगात्मक नीति अपनाई जानी चाहिए. भारत की वित्तीय व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार राजस्व एकत्र करती है, लेकिन राज्यों के साथ वित्तीय बंटवारा करों के हिस्से और विशेष योजनाओं के जरिए किया जाता है. पंजाब समेत कई राज्य सरकारें चाहती हैं कि भविष्य में इस तरह के एकमुश्त बड़े ट्रांसफर को राज्यों के साथ बांटने के स्पष्ट नियम बनाए जाएं, ताकि विकास योजनाएं और सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित न हों.
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केंद्र सरकार का रुख
फिलहाल केंद्र सरकार ने RBI डिविडेंड को राज्यों के साथ साझा करने पर सहमति नहीं दी है. पंजाब सरकार के अधिकारियों का कहना है कि वे इस मुद्दे को लगातार उठाते रहेंगे और भविष्य में इस तरह की बड़ी एकमुश्त राशि के बंटवारे को लेकर राज्यों के साथ परामर्श की मांग करेंगे. पंजाब के आम नागरिकों के लिए इस विवाद का असर स्थानीय विकास परियोजनाओं की रफ्तार और राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ सकता है.
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