पंजाब कांग्रेस में दलित बनाम सिख पर घमासान, पूर्व CM चन्नी के बयान के बाद आलाकमान ने दिल्ली में बुलाई बैठक

सभी की नजरे दिल्ली में होने वाली कांग्रेस पार्टी की 23 जनवरी की बैठक के ऊपर लग गई है जिसमें राहुल गांधी मल्लिकार्जुन खड़गे भूपेश बघेल समेत पार्टी के दिग्गज नेताओं को बुलाया गया है, वहीं पर कुछ नेताओं को अगली बैठक में बुलाए जाने की संभावना है

Amrinder Singh Raja Warring
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पंजाब कांग्रेस में एक बार फिर दलित बनाम सिख राजनीति को लेकर नई बहस तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के हालिया बयान के बाद पार्टी के भीतर गहरे मतभेद उभरकर सामने आए हैं. हालांकि चन्नी अपने दो दिन पहले दिए गए बयान पर अब यू-टर्न लेते नजर आ रहे हैं, लेकिन विवाद इतना बढ़ चुका है कि कांग्रेस आलाकमान मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने पंजाब कांग्रेस की एक अहम बैठक 23 जनवरी को दिल्ली कै पार्टी मुख्यालय में बुला ली है. इस बैठक में प्रदेश नेतृत्व, वरिष्ठ नेता और एससी विंग के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है.

चरणजीत सिंह चन्नी का आरोप


चरणजीत सिंह चन्नी का आरोप था कि पंजाब कांग्रेस में बड़े और अहम पदों पर कथित रूप से एक समुदाय विशेष को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि दलित नेताओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है. उनके इस बयान ने न सिर्फ सियासी हलकों में बल्कि पार्टी के भीतर भी हलचल मचा दी है.

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चरणजीत सिंह ने दी सफाई


विवाद बढ़ने के बाद चरणजीत सिंह चन्नी का कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और उनके खिलाफ गलत प्रचार ओर झूठा प्रोपेगंडा फैलाया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय के खिलाफ बोलना नहीं था, बल्कि पार्टी के भीतर सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात कहना था. उन्होंने कांग्रेस पार्टी का शुक्रिया अदा किया कि पार्टी ने उनपर भरोसा करके बड़ी जिम्मेवारियां सौंपी ओर उन्होंने आम लोगों की आवाज उठाई.

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने कसा तंज!


इस मसले पर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा बड़ींग ने कहा है कि मीटिंग के अंदर क्या हुआ ये मैं नहीं बता सकता क्योंकि ये पार्टी का अंदरूनी मामला है. हालांकि चन्नी की बातों पर उन्होंने कहा कि चन्नी को पार्टी ने मुख्यमंत्री बनाया. वो दो विधानसभा सीटों से चुनाव हारे थे मगर पार्टी ने उन्हें जालंधर से लोक सभा चुनाव लड़वाया और वे जीते. जब वे विधानसभा में नेता विपक्ष बने थे तो सुनील जाखड़ को हटाकर उन्हें CLP नेता बनाया गया था. चन्नी कांग्रेस वर्किंग कमेटी के परमानेंट मेंबर हैं. तो ऐसा नहीं कह सकता कोई कि कांग्रेस में दलितों को प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है. हालांकि उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक सेकुलर पार्टी है और जाती और धर्म पर आधारित निर्णय नहीं लेती है.

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इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस के एससी विंग की भूमिका भी अहम मानी जा रही है. पार्टी के एससी विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौतम द्वारा पंजाब कांग्रेस की स्थिति को लेकर जो रिपोर्ट आलाकमान को सौंपी गई है, उसे पार्टी का शीर्ष नेतृत्व गंभीरता से ले रहा है. सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस का श्रेष्ठ नेतृत्व उसी रिपोर्ट को सही मान रहा है और आगे की रणनीति उसी के आधार पर तय की जा सकती है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस किसी भी तरह का आंतरिक असंतोष नहीं चाहती. दलित और सिख समुदाय दोनों ही पंजाब की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. ऐसे में यह विवाद अगर समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो इसका सीधा फायदा विरोधी दल उठा सकते हैं. आलाकमान की बुलाई गई बैठक से यह साफ है कि कांग्रेस इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए संगठनात्मक एकता बनाए रखने की कोशिश में जुट गई है.

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फिलहाल सभी की नजरे दिल्ली में होने वाली कांग्रेस पार्टी की 23 जनवरी की बैठक के ऊपर लग गई है जिसमें राहुल गांधी मल्लिकार्जुन खड़गे भूपेश बघेल समेत पार्टी के दिग्गज नेताओं को बुलाया गया है, वहीं पर कुछ नेताओं को अगली बैठक में बुलाए जाने की संभावना है जिसमें जातिगत संतुलन खासकर शहरी इलाकों के मद्देनजर हिंदू लीडरशिप पर ज्यादा फोकस रहने की संभावना है सूत्रों के अनुसार कांग्रेस आलाकमान शहरी क्षेत्रों में जिस तरह से भाजपा अपना जनाधार बढ़ा रही है उसका मुकाबला करने के लिए प्रदेश में जातिगत संतुलन के साथ हिन्दू लीडरशिप को आगे करना चाहती है जिसके लिए नेताओं की राय ली जा रही है.

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