'किसी भी चीज की अति बुरी होती है', किसानों के सड़क जाम प्रदर्शन पर बोले पंजाब CM भगवंत मान

CM Bhagwant Mann on farmers protest: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसानों से कहा कि ‘किसी भी चीज की अति बुरी होती है’।

CM Bhagwant Mann on farmers protest

CM Bhagwant Mann on farmers protest: पंजाब के बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन चल रहा है, आज इस प्रदर्शन का तीसरा दिन है। इस प्रदर्शन के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसानों के लिए एक बयान जारी किया है। इस बयान उन्होंने किसानों से कहा कि ‘किसी भी चीज की अति बुरी होती है’। उन्होंने आगे कहा कि बिना किसी कारण के करीब हर दिन सड़कों को ब्लॉक करना उचित नहीं है। इस विरोध प्रदर्शन के कारण ट्रैफिक में भारी परेशानी हो गई है, जिससे आम यात्रियों को असुविधा हो रही है।

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किसान का विरोध प्रदर्शन

बता दें कि पंजाब में प्रमुख किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के कार्यकर्ता राज्य सरकार की धीमी धान खरीद और खाद की कमी के विरोध में सड़कों को जाम कर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के डीएपी (डाइ-अमोनियम फॉस्फेट) उर्वरक के स्टॉक में 30 प्रतिशत की कटौती करने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने डीएपी की निरंतर आपूर्ति की भी मांग की है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एम्बुलेंस और स्कूल बसों जैसी आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं को नाकाबंदी से मुक्त रखा गया है। पंधेर ने कहा कि जब तक उनकी मांगें स्वीकार नहीं कर ली जातीं, तब तक संगरूर और मोगा जिलों में एक-एक स्थान पर तथा कपूरथला जिले के फगवाड़ा और गुरदासपुर जिले के बटाला में धरना प्रदर्शन जारी रखेंगे।

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सीएम मान ने की केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात

सीएम भगवंत मान ने शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा से उनके आवास पर मुलाकात की। यहां उन्होंने केंद्रीय मंत्री से राज्य को आवंटित डीएपी खाद की 15 नवंबर तक पूरी आपूर्ति करने लिए कहा है। सीएम मान ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य भंडार में गेहूं की आपूर्ति में राज्य का योगदान करीब 50 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि गेहूं की खेती के लिए डीएपी एक बुनियादी घटक है। इस साल गेहूं की बुवाई के लिए राज्य में 4.80 लाख मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत है।

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सीएम मान ने की अपील

सीएम मान ने कहा कि अब तक राज्य को 3.30 लाख मीट्रिक टन डीएपी खाद मिली है, जो कि अपर्याप्त है। उन्होंने ने आगे कहा कि यह बात समझ में आती है कि 70 प्रतिशत डीएपी दूसरे देशों से आयात किया जाता है। इसलिए यूक्रेन युद्ध और बाकी अंतरराष्ट्रीय कारणों से डीएपी की कमी है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य में डीएपी की जरूरत मुख्य रूप से 15 नवंबर तक है, इसलिए केंद्र को बाकी राज्यों की तुलना में राज्य को डीएपी आवंटित करने में प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि बाद में इसकी जरूरत होगी।

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