मुंबई में इस समय भारी बारिश हो रही है. बता दें कि 30 जून से 6 जुलाई के बीच, देश की आर्थिक राजधानी में उतनी बारिश हुई जितनी बड़े महानगरों में आम तौर पर पूरे साल में होती है.
कोलाबा ऑब्जर्वेटरी ने 791 mm बारिश दर्ज की, जो जुलाई महीने की औसत बारिश से भी ज्यादा है. सांताक्रूज में भी 879 mm बारिश हुई, जो 919.9 mm के मासिक औसत से बस थोड़ी ही कम थी. इतनी ज्यादा बारिश से सड़कें, रेलवे और ड्रेनेज सिस्टम ठप पड़ गए, जिससे पूरा मुंबई शहर थम गया है. अब सवाल यह उठता है कि अल नीनो वाले साल में शहर में रिकॉर्ड बारिश क्यों हो रही है?
अल नीनो क्या है?
अल नीनो मौसम का एक प्राकृतिक पैटर्न है जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. आम तौर पर, भारत में कमजोर मॉनसून और सामान्य से कम बारिश का संबंध इसी से जोड़ा जाता है.
इस साल भी शुरुआत में ऐसा ही पैटर्न देखने को मिला, जब दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य समय से लगभग दो हफ्ते देरी से मुंबई पहुंचा. लेकिन जब यह पहुंचा, तो धीरे-धीरे आगे बढ़ने के बजाय बहुत जोरदार तरीके से आया.
'ड्राई' अल नीनो में भी इतनी भारी बारिश क्यों हो रही?
वैज्ञानिकों का कहना है कि इसमें कोई विरोधाभास नहीं है. मॉनसून कब आएगा, इस पर अल नीनो का असर तो अब भी होता है, लेकिन क्लाइमेट चेंज की वजह से बारिश का तरीका बदल रहा है. कई हफ्तों तक लगातार बारिश होने के बजाय, अब शहरों में बारिश वाले दिन कम हो रहे हैं, लेकिन अचानक बहुत तेज बारिश (क्लाउडबर्स्ट) हो रही है. दूसरे शब्दों में कहें तो, मॉनसून गायब नहीं हुआ है, बल्कि यह कहीं ज्यादा उग्र हो गया है.
ग्लोबल वॉर्मिंग डाल रही बारिश के तरीकों पर असर?
इस साल मॉनसून मुंबई में आम समय से लगभग दो हफ्ते देरी से पहुंचा, लेकिन मॉनसून की बारिश में तेजी दूसरे बड़े शहरों के मुकाबले ज्यादा रही. वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो और भारी बारिश का आपस में कोई विरोधाभास नहीं है.
हालांकि अल नीनो मॉनसून के आने और उसकी ताकत पर असर डालता रहता है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग बारिश के तरीके को तेजी से बदल रही है. एक बार जब मौसम का सिस्टम सक्रिय हो जाता है, तो बारिश की तीव्रता बढ़ जाती है, जिससे यह और भी अनियमित हो जाती है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई में औसत सालाना बारिश 1981 से 2000 के बीच 2,325.8 मिमी थी, जो 2001-2024 के दौरान बढ़कर 2,672.7 मिमी हो गई. यह 346.9 मिमी या लगभग 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी है.
जोरदार बारिश के पीछे क्या है साइंस?
क्लाइमेट साइंटिस्ट्स के अनुसार, गर्म होते माहौल और तेजी से गर्म होते समुद्रों की वजह से हवा में ज्यादा नमी जमा हो रही है. इसलिए, अब बारिश कई दिनों तक फैलने के बजाय कम समय में जोरदार बौछारों के रूप में हो रही है. मुंबई में बारिश के रिकॉर्ड में भी यह ट्रेंड साफ दिखता है.
IMD के पूर्व डायरेक्टर जनरल डॉ. केजे रमेश ने कहा, 'अल नीनो वाले सालों में बारिश वाले दिनों की संख्या कम होती है. लेकिन हम जानते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से मॉनसून का मिजाज हमेशा के लिए बदल गया है. अब बारिश अक्सर कम समय में जोरदार होती है, चाहे अल नीनो हो या न हो.'
यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के एमेरिटस प्रोफेसर और IIT बॉम्बे के पूर्व प्रोफेसर डॉ. रघु मुर्तुगुड्डे ने कहा कि कई मौसम प्रणालियों के एक साथ मिलने से इतनी भारी बारिश हुई. उन्होंने कहा, 'मुंबई में मॉनसून की शुरुआत देर से हुई, जिसकी एक वजह अल नीनो भी है.'
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क्या अल नीनो का ग्लोबल वार्मिंग से सीधा संबंध है?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, जैसा कि अनुमान था, पश्चिमी एशिया में ग्लोबल वार्मिंग का पैटर्न और अरब सागर की हवाओं में बदलाव अहम भूमिका निभा रहे हैं.
रघु मुर्तुगुड्डे ने बताया, 'अरब सागर और बंगाल की खाड़ी, दोनों ही मॉनसून सिस्टम में नमी पहुंचा रहे हैं और बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है. जब ये दोनों सिस्टम सक्रिय होते हैं, तो मुख्य मॉनसून क्षेत्र में भारी बारिश होती है और वह नमी मुंबई तक भी पहुंचती है.'