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उद्धव ठाकरे को एक और झटका! संसद में छिन सकता है पार्टी ऑफिस, जानें क्या हैं नियम?

Parliament Party Office Rules: महाराष्ट्र की राजनीति से बड़ी खबर! 6 बागी सांसदों के अलग गुट को मान्यता मिलते ही उद्धव ठाकरे गुट से संसद का कार्यालय छिन सकता है. जानिए क्या है लोकसभा सचिवालय का 5 सांसदों वाला वो नियम.

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Parliament Party Office Rules: महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. सांसदों के बगावती रुख के बाद अब उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना यूबीटी) को संसद परिसर में भी बड़ा झटका लग सकता है. अगर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 6 बागी सांसदों के गुट को अलग राजनीतिक समूह के रूप में आधिकारिक मान्यता दे दी, तो पुराने संसद भवन में स्थित शिवसेना (यूबीटी) का संसदीय दल कार्यालय उनके हाथ से निकल जाएगा.

क्या है लोकसभा सचिवालय का नियम?

संसद में किसी भी राजनीतिक दल को कार्यालय आवंटित करने के कड़े नियम हैं. नियमों के मुताबिक संसद परिसर में अलग कार्यालय केवल उसी दल को मिलता है जिसके पास कम से कम 5 या उससे अधिक सांसद हों. वर्तमान में उद्धव ठाकरे गुट का कार्यालय पुराने संसद भवन के कमरा संख्या 128 ए में है. यदि 6 बागी सांसद अलग गुट बनाकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होते हैं, तो लोकसभा में उद्धव ठाकरे के पास केवल 3 सांसद ही बचेंगे. संख्या बल 5 से कम होते ही लोकसभा सचिवालय उनका यह कार्यालय वापस ले लेगा.

सर्वदलीय बैठकों से भी हो जाएंगे बाहर

कार्यालय छिनने के अलावा उद्धव ठाकरे को राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ा नुकसान होगा. केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय और संसदीय मुद्दों पर बुलाई जाने वाली सर्वदलीय बैठकों में भी उन दलों को आमंत्रित नहीं किया जाता जिनके पास 5 से कम सांसद होते हैं. ऐसे में उद्धव गुट इन महत्वपूर्ण बैठकों से भी बाहर हो जाएगा.

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स्पीकर के सामने लगाई गुहार, विधायकों के भी टूटने का डर

शिवसेना (यूबीटी) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से बागी गुट को मान्यता न देने का आग्रह किया है. इस सिलसिले में बुधवार को उद्धव गुट के सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने स्पीकर से मुलाकात भी की है. दूसरी ओर, सूत्रों के हवाले से खबर है कि उद्धव गुट के 20 में से 14 विधायक भी पाला बदलकर एकनाथ शिंदे के साथ जाने की तैयारी में हैं. इस संभावित दलबदल पर शिंदे गुट के नेता दीपक केसरकर ने कहा कि इससे महायुति और एनडीए (NDA) की ताकत और बढ़ेगी. इस बड़े संकट से निपटने के लिए उद्धव ठाकरे ने अपने वरिष्ठ नेताओं की आपात बैठक बुलाई है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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