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उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले 105 शहीदों का किया अपमान: BJP प्रदेश अध्यक्ष

आज बीएमसी सहित 29 महानगर पालिका के चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है. चुनाव प्रचार के आखिरी भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने शिवसेना UBT के प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को जमकर निशाने पर लिया है. पढ़ें मुंबई से राहुल पांडे की रिपोर्ट.

आज बीएमसी सहित 29 महानगर पालिका के चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है. चुनाव प्रचार के आखिरी भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने शिवसेना UBT के प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को जमकर निशाने पर लिया है. चव्हाण ने कहा कि संयुक्त महाराष्ट्र के लिए 105 शहीदों ने जो खून बहाया, उस आंदोलन पर गोलियां चलाने का पाप कांग्रेस का है और यह इतिहास में दर्ज एक अटल सत्य है. उसी कांग्रेस के साथ सरकार बनाकर उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले 105 शहीदों का अपमान किया है.

सत्तर वर्ष पहले, 16 जनवरी 1956 को पंडित नेहरू ने मुंबई को केंद्रशासित करने की घोषणा की थी. उसी घटना से प्रेरित होकर बालासाहेब ठाकरे ने “मराठी माणूस के न्यायसंगत अधिकारों” के लिए शिवसेना की स्थापना की, यह भी एक निर्विवाद सत्य है. उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी के नेता जानबूझकर यह तथ्य भूल जाते हैं कि संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलनकारियों पर गोलीबारी करने वाले उस समय महाराष्ट्र में भी कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे और केंद्र में भी कांग्रेस की ही सरकार थी. आज कांग्रेस की गोद में बैठकर मराठी अस्मिता का ढोल पीटना, कांग्रेस की बंदूक अपने कंधे पर रखकर चलाने जैसा है, ऐसी तीखी आलोचना भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने कि वे मुंबई में महापालिका चुनाव प्रचार के समापन के अवसर पर पत्रकारों से बात कर रहे थे.

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उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले 105 शहीदों का अपमान किया है

रविंद्र चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस के समर्थन से उद्धव ठाकरे ने अपनी सरकार बनाकर 105 शहीदों का अपमान किया. केवल अपनी राजनीतिक दुकान चलाने के लिए कांग्रेस से हाथ मिलाते समय उद्धव ठाकरे को मराठी अस्मिता का सुविधाजनक विस्मरण हो गया, यह महाराष्ट्र की जनता ने देखा है.

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उन्होंने आगे कहा कि 1990 के दशक में कोंकण में रेलवे आई, लेकिन उस समय कांग्रेस सत्ता में नहीं थी. मधु दंडवते और जॉर्ज फर्नांडिस जैसे दूरदर्शी नेताओं के प्रयासों से कोंकण रेलवे शुरू हुई. 2014 के बाद कोंकण रेलवे के कई स्टेशनों और आस-पास के इलाकों का कायाकल्प हुआ, वे आधुनिक और सुसज्जित बने. यह सब भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुआ. कांग्रेस के सत्ता में रहते हुए कोंकण के लिए कुछ नहीं किया गया, लेकिन उन्हीं कोंकणी लोगों के समर्थन से उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस की बैसाखियों के सहारे मुख्यमंत्री पद हासिल किया,यह मुद्दा भी रविंद्र चव्हाण ने उठाया.

उबाठा सेना और मनसे बाकी दलों से ज़्यादा मराठी के हितैषी कैसे हो गए? क्या किसी ने इसका ईमानदारी से उत्तर खोजने का प्रयास किया है? ऐसा सवाल उठाते हुए चव्हाण ने कहा कि यहां जन्मा कोई अमराठी भाषी सिर्फ इसलिए भाजपा में नहीं आता कि वह अमराठी है, बल्कि अन्य दलों में नेतृत्व, विचारधारा और भविष्य सीमित हैं, इसलिए वह भाजपा में आता है, यह वास्तविकता है.

मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा दिलाने का काम भाजपा ने किया है

उन्होंने कहा कि भाजपा ने मराठी भाषा, मराठी संस्कृति और मराठी माणूस के लिए ठोस काम किया है. मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा दिलाने के लिए देवेंद्र फडणवीस और भाजपा नेताओं ने लगातार केंद्र सरकार के स्तर पर प्रयास किए. मेरी ‘माय मराठी’ को अभिजात भाषा का दर्जा मिला, यह फडणवीस जी के लगातार प्रयासों का ही परिणाम है, इसे स्वीकार करना होगा.

मराठी भाइयों को BDD चॉल में घर सीएम फडणवीस के प्रयासों से मिला

एक प्रश्न के उत्तर में रविंद्र चव्हाण ने स्पष्ट किया कि मुंबई की BDD चाली में रहने वाले मराठी भाइयों को उनका हक का घर केवल देवेंद्र फडणवीस की सरकार की पहल से ही मिल सका है. चुनाव आते ही ठाकरे साहब को मराठी माणूस याद आता है, वरना पांच साल तक वे ‘मराठी’ शब्द भी भूल जाते हैं. महापालिका के ठेके देते समय उद्धव ठाकरे को परप्रांतीय ठेकेदार ही चाहिए होते हैं, लेकिन पिछले 30 वर्षों में उन्होंने मुंबई के मराठी माणूस के लिए वास्तव में क्या किया, यह सार्वजनिक रूप से बताने का साहस करें, ऐसी चुनौती उन्होंने उबाठा सेना को दी.

भाजपा के मराठी संस्कृति में योगदान पर बोलते हुए रविंद्र चव्हाण ने कहा कि आज पूरे देश में जिस गुड़ी पाड़वा की भव्य हिंदू नववर्ष शोभायात्रा का गौरव से उल्लेख होता है, वह डोंबिवली के संघ–भाजपा कार्यकर्ताओं की ही संकल्पना है, जो आज पूरे महाराष्ट्र के लिए प्रेरणादायी बन चुकी है. उन्होंने आगे कहा कि “तुम यानी मराठी माणूस नहीं और तुम यानी मुंबई नहीं”, यह बात देवेंद्रजी बार-बार कहते हैं, लेकिन इस सत्य को स्वीकार करने की मानसिकता और वैचारिक तैयारी उबाठा नेताओं में नहीं है, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है.

उद्धव ठाकरे ने मी मराठी की पहचान छीनी

रविंद्र चव्हाण ने “मी मराठी” की पहचान को बदलकर “मी मुंबईकर” की संकल्पना मुंबई के मराठी माणूस पर किसने थोपी? मुंबई की मराठी पहचान मिटाने का पाप “मी मुंबईकर” अभियान के जरिए खुद उद्धव ठाकरे ने किया। क्या ये बदलाव बाळासाहेब ठाकरे जी को स्वीकार्य थे? इसका ईमानदार उत्तर भी उद्धव ठाकरे को देना चाहिए. मराठी माणूस का सम्मान, भाषा, संस्कृति और भविष्य, इन सब पर केवल भावनाओं के बुलबुले खड़े करने के बजाय, घोषणाओं से अधिक महत्वपूर्ण होता है कि वास्तव में क्या काम किया गया है और यह काम केवल भाजपा ने करके दिखाया है.


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