मुंबई से सटे ठाणे की जमीन से एक ऐसा राज बाहर आया है, जिसने 12 साल तक दफन रहकर अब सनसनी फैला दी है. एक गुमशुदगी, जो वक्त के साथ फाइलों में धूल खा रही थी, अब एक साजिशन कत्ल की कहानी बनकर सामने आई है. इस कहानी का सबसे चौंकाने वाला चेहरा, सोशल मीडिया पर ‘रील स्टार’ बनकर पहचान बटोरने वाला शख्स, जो असल जिंदगी में एक बेरहम कातिल निकला.
साल 2014, डोंबिवली के दावडी इलाके से 23 वर्षीय करण बागुल अचानक लापता हो जाता है. परिवार की बेचैनी, पुलिस में शिकायत, तलाश की कोशिशें, सब कुछ होता है, लेकिन नतीजा सिफर. वक्त गुजरता गया, उम्मीदें टूटती गईं और मामला ठंडे बस्ते में चला गया. लेकिन सच कभी मरता नहीं.
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हाल ही में क्राइम ब्रांच के हाथ एक ऐसी कड़ी लगी, जिसने इस सन्नाटे को तोड़ दिया. एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर जब सख्ती से पूछताछ हुई, तो उसने जो बताया, उसने इस केस को एक झटके में पलट दिया. सामने आया कि यह कोई साधारण गुमशुदगी नहीं, बल्कि जमीन के सौदे में पैसों के विवाद से उपजी एक सुनियोजित हत्या थी. एक ऐसी साजिश, जिसमें लालच ने इंसानियत का गला घोंट दिया.
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4 अक्टूबर 2014, यह वह दिन था जब करण की जिंदगी खत्म कर दी गई. उसे अगवा कर दावडी के एक ऑफिस में ले जाया गया. वहां जो हुआ, वह रूह कंपा देने वाला था. लोहे की रॉड से सिर और चेहरे पर लगातार वार, बेरहमी की सारी हदें पार कर दी गईं. कुछ ही पलों में एक जिंदा इंसान लाश में तब्दील हो गया.
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लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती, असली खौफनाक अध्याय तो इसके बाद शुरू हुआ. हत्या के बाद आरोपियों ने सबूत मिटाने की ठानी. शव को कार में डालकर मुरबाड के बारवी डैम के पास घने जंगल में फेंक दिया गया, इस उम्मीद में कि यह राज हमेशा के लिए दफन हो जाएगा. उस वक्त मिले एक अज्ञात शव की फाइल अब दोबारा खोली गई, और सच सामने आ गया,वह शव करण बागुल का ही था.
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12 साल बाद, एक गुमनाम लाश को नाम मिला, और एक परिवार को अपने सवालों का जवाब. क्राइम ब्रांच ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. हत्या में इस्तेमाल लोहे की रॉड भी बरामद कर ली गई है. अदालत ने सभी आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया है, जहां उनसे और गहराई से पूछताछ की जा रही है. जांच अधिकारी के मुताबिक, यह केस तकनीकी सबूतों और गुप्त सूचनाओं के दम पर सुलझाया गया है. लेकिन कहानी अभी अधूरी है. पुलिस अब यह भी खंगाल रही है कि इस साजिश में और कौन-कौन शामिल था. क्या यह सिर्फ तीन लोगों का खेल था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क छिपा है?
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