गणेश चतुर्थी के मौके पर अदाणी एंटरप्राइजेज के डायरेक्टर प्रणव अदाणी और अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अदाणी ने अपने परिवार के साथ मुंबई के प्रसिद्ध 'चिंचपोकली च्या चिंतामणी' के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की. इस मौके पर प्रणव अदाणी ने कहा, 'चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल के साथ जुड़ना हमारे लिए बेहद सम्मान की बात है. अपने 107वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी चिंचपोकली च्या चिंतामणी की यह समृद्ध विरासत मुंबई की भक्ति, एकता और सांस्कृतिक धड़कन का प्रतीक है.'
107 वर्षों का ऐतिहासिक सफर
मुंबई के दूसरे सबसे पुराने सार्वजनिक गणपति पंडालों में शुमार 'चिंचपोकली च्या चिंतामणी' अपनी स्थापना के 107वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है. इस मंडल की जड़ें शहर के ऐतिहासिक टेक्सटाइल हब परल, गिरगांव, लालबाग से जुड़ी हैं. यह मंडल स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की उस ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ा रहा है, जिन्होंने 1890 के दशक में गणेशोत्सव को एक घरेलू अनुष्ठान से बदलकर सामाजिक और राष्ट्रीय एकता के जन-आंदोलन का रूप दिया था. साल 1939 से यह भव्य आयोजन चिंचपोकली रेलवे स्टेशन के पूर्वी हिस्से में निरंतर होता आ रहा है.
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भगवान वेंकटेश्वर की थीम
हर साल अपनी अनूठी और भव्य थीम के लिए मशहूर चिंतामणी पंडाल में इस बार श्रद्धालुओं को दक्षिण भारतीय मंदिर वास्तुकला का अनुभव मिल रहा है. बप्पा की प्रतिमा तिरुमाला तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की थीम पर आधारित है, जिसमें पारंपरिक गरुड़, कीर्तिमुख, शंख, चक्र और कपूर का तिलक प्रमुखता से उकेरा गया है. पंडाल का ढांचा हैदराबाद और भुवनगिरी स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर (स्वर्णागिरी) की स्थापत्य कला से प्रेरित होकर तैयार किया गया है, जिसमें गगनचुंबी गोपुरम, पवित्र दीपस्तंभ और नक्काशीदार 'याली' संरक्षक आकृतियां शामिल हैं.
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