पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (PMC) बैंक से जुड़ा वित्तीय घोटाला अब और गहराता जा रहा है। पहले पृथ्वी रियल्टर्स को 87 करोड़ रुपए कागजों पर मंजूर कर उसे बिना चुकाए 150 करोड़ रुपए का बकाया दिखाने का मामला अभी शांत भी नही हुआ था कि अब आवास डेवेलपर्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड का नाम सुर्खियों में है। कंपनी को बैंक की ओर से 135 करोड़ तक की क्रेडिट सीमा मंजूर की गई थी, लेकिन मिले डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, वास्तव में केवल 30 करोड़ की राशि ही कंपनी को दी गई। फिर भी बैंक ने कंपनी से 170 करोड़ की वसूली की मांग कर डाली है।
वित्तीय जांच से जुड़े एक निजी ऑडिट की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2012 के बाद आवास डेवेलपर्स को कोई नया फंड जारी नहीं किया गया। इसके बावजूद बैंक लगातार उनकी क्रेडिट लिमिट बढ़ाता रहा है। कभी 75 करोड़, कभी 65 करोड़, लेकिन वास्तविक राशि कभी खाते में नहीं पहुंची। रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंक ने केवल ब्याज जोड़कर लोन को ‘एक्टिव’ दिखाने की कोशिश की।
कंपनी ने बैंक के दावे को ठहराया गलत
कंपनी का दावा है कि उसने मुंबई, पालघर और ठाणे जैसे क्षेत्रों में संपत्तियां बैंक के पास गिरवी रखीं। यह मानते हुए कि उसे मंजूर राशि समय पर मिलेगी। लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ और फर्जी तरीके से ब्याज जोड़कर देनदारी बढ़ाई गई, तो कंपनी ने बैंक के 170 करोड़ के दावे को गलत ठहराया है।
87 करोड़ का लोन कागजों पर मंजूर
ऐसा ही मामला पहले प्रिथ्वी रियल्टर्स एंड होटल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ भी सामने आया था। वहां 87.5 करोड़ का लोन मंजूर तो किया गया, लेकिन एक भी रुपया नहीं मिला। फिर भी कंपनी पर 150 करोड़ से अधिक की देनदारी दिखाई गई। यह मामला फिलहाल नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में विचाराधीन है। भारतीय रिजर्व बैंक की 2019 की रिपोर्ट में भी इस तरह की गड़बड़ियों की पुष्टि की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ने 21,000 से अधिक फर्जी लोन एंट्री बनाकर 5,000 करोड़ से ज्यादा का नकली व्यापार दिखाया। यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया में है और आने वाले समय में इससे जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।