मुंबई में आयोजित ‘लक्ष्मणराव गुट्टे रूरल डेवलपमेंट फाउंडेशन, पुणे’ द्वारा आयोजित “पूर्व प्रदेश पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी कृतज्ञता एवं स्नेह मिलन” कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता शरद पवार शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कई दशकों तक युवक कांग्रेस और अन्य सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के माध्यम से राज्य और देश की राजनीति में योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं से संवाद किया और इस सामुदायिक पहल की सराहना की।
इसके साथ साथ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की है। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर बोलते हुए पवार ने कहा कि आज देश भले ही एक अलग स्थिति से गुजर रहा हो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बनाए रखने का काम वे कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब देश की प्रतिष्ठा की बात आती है, तब राजनीतिक मतभेदों को अलग रखना चाहिए।
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कार्यक्रम स्थल पर हुआ उनका शानदार सम्मान
शरद पवार ने कहा कि उन्हें पहले बताया गया था कि महाराष्ट्र की युवा राजनीति में लंबे समय तक काम करने वाले पूर्व अध्यक्ष, सचिव और अन्य पदाधिकारी एकत्र होकर पुरानी यादें साझा करेंगे। लेकिन कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद उनका सम्मान किया गया और सभी लोग पुरानी यादों में इतने खो गए कि अपने अनुभव साझा करना ही भूल गए। भले ही आज सभी लोग अलग-अलग राजनीतिक दलों में कार्यरत हों, लेकिन समाज और आम लोगों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अब भी कायम है।
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पवार ने अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि वर्ष 1958 में 18 वर्ष की आयु में वे बारामती से पढ़ाई के लिए पुणे आए थे। उस समय बारामती में कॉलेज नहीं था। पुणे आने के बाद वे युवक आंदोलन से जुड़े और कुछ वर्षों बाद पुणे शहर युवक कांग्रेस के प्रमुख बने। बाद में उन्हें महाराष्ट्र युवक कांग्रेस और फिर राष्ट्रीय स्तर पर काम करने का अवसर मिला।
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पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी से जुड़े अनुभव बताए
अपने संबोधन में उन्होंने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़े कई अनुभव साझा किए। पवार ने बताया कि एक बार युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों ने इंदिरा गांधी से नेहरू जी से मिलने की इच्छा जताई थी। इसके बाद दिल्ली स्थित त्रिमूर्ति भवन में बैठक आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि नेहरू जी के व्यक्तित्व का प्रभाव इतना बड़ा था कि सभी युवा नेता उनसे सवाल पूछने की तैयारी करके गए थे, लेकिन सामने आने पर सब कुछ भूल गए। उन्होंने इंदिरा गांधी से जुड़ा एक प्रसंग भी साझा किया।
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बताया इंदिरा गांधी के नेतृत्व में क्या सीखने को मिला?
पवार ने बताया कि जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री रहते हुए रूस दौरे पर गई थीं, तब वहां उनके स्तर का कोई वरिष्ठ नेता स्वागत के लिए मौजूद नहीं था। इससे इंदिरा गांधी नाराज हुईं और सीधे भारतीय दूतावास पहुंच गईं। बाद में रूसी नेतृत्व को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने जाकर माफी मांगी। उस समय इंदिरा गांधी ने कहा था कि वह 40 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करती हैं और देश की प्रतिष्ठा से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। शरद पवार ने कहा कि इंदिरा गांधी जैसे नेतृत्व से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला और उनके साथ काम करने का अवसर मिलना उनके जीवन का सौभाग्य रहा। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पी.वी. नरसिंह राव और डॉ. मनमोहन सिंह जैसे नेताओं के साथ काम करने का अवसर मिला।
भारत की साख बढ़ाने का काम कर रहे हैं प्रधानमंत्री
वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर बोलते हुए पवार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बनाए रखने का काम वे कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब देश की प्रतिष्ठा की बात आती है, तब राजनीतिक मतभेदों को अलग रखना चाहिए।उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी पूर्व पदाधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि अलग-अलग दलों में होने के बावजूद पुराने साथियों का इस तरह एक मंच पर आना लोकतांत्रिक संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। पवार ने सभी से राष्ट्रहित के कार्यों में सामूहिक रूप से आगे आने का आह्वान किया।