Sharad Pawar On Pulwama Attack: जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के बाद अब एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने पुलवामा अटैक पर सवाल उठाए दिए हैं। शरद पवार ने शुक्रवार को मुंबई में पूर्व राज्यपाल मलिक के बयान का जिक्र किया। साथ ही गुजरात के नरोदा गाम नरसंहार मामले में आरोपियों के बरी होने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने पुलवामा हमले को लेकर कई बातों का खुलासा किया। हमने इस पर कोई जांच होते नहीं देखा है। 40 जवानों की जान गई थी। सुरक्षा बल द्वारा एक विमान की मांग की गई थी, लेकिन इसे अस्वीकार कर दिया गया था। पूर्व राज्यपाल ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें घटना के बारे में तथ्यों का खुलासा नहीं करने के लिए कहा गया था। शरद पवार ने कहा कि यह 100% राज्य सरकार की जिम्मेदारी थी, क्योंकि उन्होंने चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। एक सिटिंग जज को इस घटना की जांच करनी चाहिए और वास्तविक तथ्य सामने आने चाहिए।

पुलवामा में शहीद हुए थे 40 जवान

14 फरवरी 2019 को करीब सवा तीन बजे एक आतंकी घटना ने देश को झकझोर दिया था। आतंकियों ने जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग से होकर सीआरपीएफ का काफिला पर हमला कर दिया था। काफिले में अधिकतर बसें थीं जिनमें जवान बैठे थे। जैसे ही यह काफिला पुलवामा पहुंचा, तभी दूसरी तरफ से एक कार आई और काफिले की एक बस में टक्‍कर मार दी। कार में भारी मात्रा में विस्‍फोटक रखा था। टक्कर होते ही बड़ा विस्फोट हुआ और इसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए। नरोदा गाम फैसले पर कहा- संविधान भी मारा गया शरद पवार ने कहा कि कल हमने गुजरात की एक खबर देखी। गुजरात दंगों के दौरान जिन लोगों का नाम सामने आया, उनमें विधायक और पूर्व मंत्री भी थे। उन्हें कोर्ट ने बरी कर दिया। जो मारे गए, वो चले गए। लेकिन कानून और संविधान भी मारा गया है। ऐसा सिर्फ इसलिए हुआ है क्योंकि सत्ता हाथ में है।

पूर्व विधायक माया कोडनानी समेत 68 आरोपी हुए बरी

दरअसल, गुरुवार को नरोदा गाम नरसंहार मामले में अहमदाबाद की विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। आरोपियों में पूर्व भाजपा विधायक माया कोडनानी और बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी शामिल थे। इस मामले में 86 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। जिनमें 18 की मौत हो चुकी है, अब 68 आरोपी बचे थे। मामले में 11 लोगों की जान गई थी। डिफेंस वकील राजेश मोदी ने बताया कि 2002 में नरोदा गाम में कुछ हादसे हुए। जिसमें 11 लोगों की जान चली गई थी। कुछ घरों को जलाया गया था। कोर्ट ने 2009 में 83 आरोपियों पर चार्जफ्रेम किया था। यह भी पढ़ें: रोका नहीं गया तो और लोगों को मारेंगे, ओवैसी ने गैंगस्टर अतीक-अशरफ के हत्यारों को बताया गोडसे का अनुयायी