एक के बाद एक MP छोड़ते जा रहे साथ, उद्धव ठाकरे बोले- ऐसे संकट पहले भी आए, पर मैं डगमगाया नहीं

शिवसेना यूबीटी के 6 सांसद उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर शिंदे गुट में शामिल होने दिल्ली पहुंचे हैं. सांसद ओमराजे निंबालकर ने फंड की कमी और सत्ता की राह चुनने को मुख्य वजह बताया.

Uddhav Thackeray (1)

उद्धव ठाकरे गुट को लगा एक और बड़ा झटका!

महाराष्ट्र की सियासत में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना यूबीटी को अब तक का सबसे बड़ा और तगड़ा झटका लगा है. पार्टी के भीतर चल रही बगावत की खबरें अब पूरी तरह सच साबित हो चुकी हैं क्योंकि पार्टी के 6 सांसद एक साथ पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने जा रहे हैं. इस बड़ी टूट के बाद लोकसभा में उद्धव ठाकरे के पास अब केवल 3 सांसद ही बचे रह जाएंगे. बागी रुख अपनाने वाले ये सभी 6 सांसद देश की राजधानी दिल्ली पहुंच रहे हैं, जहां वे सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट का दामन थामेंगे. इस बड़े राजनीतिक संकट पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्होंने पहले भी ऐसे संकट देखे हैं और वे इससे बिल्कुल नहीं डरे हैं, जनता चुनाव में इसका बदला जरूर लेगी.

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ओमराजे निंबालकर ने बयां किया अपना दर्द

इस पूरे दलबदल अभियान की अगुवाई कर रहे धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ हुई बैठक में अपनी बात पूरी तरह साफ कर दी. निंबालकर ने कहा कि शिंदे गुट में शामिल होने का फैसला पूरी तरह फाइनल हो चुका है और अब सिर्फ आधिकारिक घोषणा होना ही बाकी है. उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं के सामने मजबूरी जाहिर करते हुए कहा कि हम कब तक सीमित संसाधनों और बिना किसी सरकारी सहयोग के विरोधियों से लड़ते रहेंगे. विपक्ष के पास राजनीतिक ताकत के साथ-साथ भारी आर्थिक मजबूती भी मौजूद है. उन्होंने कहा कि जिन ताकतों का विरोध करने के लिए वे राजनीति में आए थे, वे कांग्रेस और बीजेपी दोनों सरकारों के कार्यकाल में फल-फूल रही हैं, इसलिए अब उन्होंने सत्ता की राह पर आगे बढ़ने का फैसला किया है.

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संजय राउत ने बागियों पर साधा निशाना

सांसद निंबालकर ने क्षेत्र की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि आज जमीनी स्तर पर हालात इतने खराब हैं कि किसानों के एक साधारण बिजली ट्रांसफार्मर को ठीक कराने के लिए भी सरकार से कोई फंड नहीं मिल पा रहा है. हर साल सिर्फ कागजी अनुमान ही तैयार किए जाते हैं. उनके विरोधी स्थानीय नेता खुद विधायक हैं और उनकी पत्नी जिला परिषद की सदस्य हैं, ऐसे में वे अपने कार्यकर्ताओं को इस तरह असहाय और बेबस नहीं छोड़ सकते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यकर्ताओं के काम के सरकारी बिलों का भुगतान भी जानबूझकर रोका जा रहा है. दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी माने जाने वाले राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस बगावत पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि पार्टी में बहुत से लोग आते हैं और बहुत से चले जाते हैं, लेकिन असली ठाकरे हमेशा अपनी जगह पर टिके रहते हैं.

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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के पाले में पहुंची गेंद

इस पूरे हाई-प्रोफाइल दलबदल मामले को लेकर अब देश की कानूनी और संसदीय सरगर्मी भी काफी तेज हो गई है. बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास एक आवेदन भेजकर असली शिवसेना के साथ अपने विलय को मंजूरी देने की मांग की है. इन सांसदों का दावा है कि उनके पास दलबदल विरोधी कानून की कार्रवाई से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई से ज्यादा का बहुमत मौजूद है, इसलिए उन पर यह कानून लागू नहीं होता है. दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे के खेमे ने इन बागी सांसदों की सदस्यता रद्द कराने और उन्हें अयोग्य घोषित करने के लिए स्पीकर के सामने एक जवाबी याचिका दायर की है. अब पूरी गेंद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पाले में है, जिनका आने वाला फैसला ही यह तय करेगा कि इन 6 सांसदों की सदस्यता बचेगी या फिर वे अयोग्य ठहराए जाएंगे.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

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राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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