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महाराष्ट्र में 'घोस्ट हॉस्टल' का बड़ा खेल! CAG रिपोर्ट में करोड़ों के खर्च और जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल

मार्च 2024 तक महाराष्ट्र में 443 सरकारी और 2,388 सरकारी सहायता प्राप्त हॉस्टल संचालित होने का दावा किया गया है. इनमें करीब 1.62 लाख छात्र-छात्राएं रह रहे हैं. ऑडिट अवधि के दौरान इन हॉस्टलों पर राज्य सरकार ने 2,321 करोड़ रुपये खर्च किए. CAG ने 18 सरकारी और 21 सहायता प्राप्त हॉस्टलों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया.

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महाराष्ट्र में पिछड़े वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों के लिए संचालित सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त हॉस्टलों की व्यवस्था पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक कई ऐसे हॉस्टल मिले जो कागजों पर तो चल रहे थे, लेकिन जमीन पर या तो उन पर ताले लटके थे या फिर वहां छात्रों के रहने के कोई सबूत नहीं मिले. इसके बावजूद इन संस्थानों को वर्षों तक सरकारी अनुदान मिलता रहा.

CAG की जांच में सामने आया कि सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग ने चार वर्षों के दौरान 6 ऐसे संस्थानों को करीब 1.62 करोड़ रुपये जारी किए, जिन्हें ऑडिट में ‘घोस्ट हॉस्टल’ यानी केवल कागजों पर संचालित हॉस्टल पाया गया.

रिपोर्ट में जालना जिले के मोदीखान हॉस्टल का विशेष उल्लेख किया गया है. ऑडिट टीम जब वहां पहुंची तो इमारत जर्जर हालत में बंद मिली. हालांकि सरकारी रिकॉर्ड में यहां 38 छात्र और एक अधीक्षक तैनात दिखाए गए थे. हैरानी की बात यह है कि इस हॉस्टल को चार वर्षों में मानदेय के रूप में करीब 18 लाख रुपये जारी किए गए. इसी तरह जाफराबाद स्थित एक अन्य हॉस्टल में 24 छात्रों के नाम दर्ज थे, लेकिन मौके पर केवल धूल से भरे खाली कमरे और बिस्तर मिले. जालना के अलावा बुलढाणा और लातूर में भी ऐसे कई हॉस्टल सामने आए.

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करोड़ों रुपये खर्च, लेकिन सुविधाओं का अभाव

मार्च 2024 तक महाराष्ट्र में 443 सरकारी और 2,388 सरकारी सहायता प्राप्त हॉस्टल संचालित होने का दावा किया गया है. इनमें करीब 1.62 लाख छात्र-छात्राएं रह रहे हैं. ऑडिट अवधि के दौरान इन हॉस्टलों पर राज्य सरकार ने 2,321 करोड़ रुपये खर्च किए. CAG ने 18 सरकारी और 21 सहायता प्राप्त हॉस्टलों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान कई हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव मिला. कई जगह डाइनिंग हॉल, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, CCTV, बिजली बैकअप, अखबार और टीवी जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं. कुछ हॉस्टलों में छात्रों को टेबल-कुर्सियों की व्यवस्था न होने के कारण फर्श पर बैठकर भोजन करना पड़ रहा था. नियमित स्वास्थ्य जांच और मेडिकल सुविधाएं भी लगभग नदारद मिलीं.

दिव्यांग छात्रों के लिए भी नियमों की अनदेखी

अहिल्या नगर, धाराशिव, जालना और नागपुर के कुछ हॉस्टलों में दिव्यांग छात्रों को ऊपरी मंजिलों पर कमरे आवंटित किए गए, जबकि नियमों के अनुसार उन्हें ज़मीन पर आवास दिया जाना चाहिए. CAG ने इसे गंभीर लापरवाही माना है.

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रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 280 सरकारी हॉस्टलों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लगाने का दावा किया गया था, लेकिन इनमें से केवल 46 हॉस्टलों में ही मशीनें चालू हालत में मिलीं. कई जगह साफ-सफाई, पीने के पानी, पर्याप्त रोशनी और गुणवत्तापूर्ण भोजन जैसी मूलभूत सुविधाओं की भी कमी पाई गई. आवश्यक अनाज का एक महीने का बफर स्टॉक भी कई हॉस्टलों में उपलब्ध नहीं था.

करोड़ों का बजट खर्च नहीं हो सका

CAG ने फंड के उपयोग पर भी सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 में सरकारी हॉस्टलों के लिए आवंटित 487 करोड़ रुपये में से 56.65 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं किए गए. वहीं राज्य के 117 तालुकों में अब भी सरकारी हॉस्टल नहीं हैं, जिससे करीब 8,930 छात्र आवास सुविधा से वंचित हैं.

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स्टाफ की भारी कमी

ऑडिट में यह भी सामने आया कि 49 सरकारी हॉस्टल बिना अधीक्षक के संचालित हो रहे थे, जबकि पांच बालिका हॉस्टलों की जिम्मेदारी पुरुष अधीक्षकों के पास थी. इसके अलावा वर्ष 2020 तक 500 सरकारी हॉस्टल बनाने का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो सका. पर्याप्त फंड उपलब्ध होने के बावजूद राज्य में केवल 443 हॉस्टल ही बन पाए. CAG की रिपोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि छात्रों के कल्याण के लिए बनाई गई योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां हैं.

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