Maharashtra politics: महाराष्ट्र की सियासत में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) को एक के बाद एक बड़े झटके लग रहे हैं. सोमवार को पार्टी में उस समय हड़कंप मच गया जब एक तरफ शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों ने औपचारिक तौर पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट का दामन थाम लिया, वहीं दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई विधायकों की बेहद महत्वपूर्ण बैठक से 3 विधायक और 1 एमएलसी नदारद रहे. इस घटना ने महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में नई बगावत की सुगबुगाहट को हवा दे दी है.

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यह बैठक महाराष्ट्र विधानसभा के चल रहे मानसून सत्र के पहले दिन पार्टी के 'शिवालय' दफ्तर में आयोजित की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य सत्र के दौरान महायुति सरकार को आक्रामक रूप से घेरने की रणनीति तैयार करना था. लेकिन जिस समय उद्धव ठाकरे अपने नेताओं के साथ रणनीति बना रहे थे, ठीक उसी समय वहां से महज 500 मीटर दूर यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान में पार्टी के 6 बागी सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में विरोधी गुट में शामिल हो रहे थे.

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बैठक से गायब रहे ये चार बड़े चेहरे

उद्धव गुट की इस बैठक में विधायक संजय देरकर, राहुल पाटिल, संजय पोतनीस और एमएलसी सुनील शिंदे शामिल नहीं हुए. गौर करने वाली बात यह है कि सुनील शिंदे वही नेता हैं जिन्होंने आदित्य ठाकरे के लिए अपनी वर्ली विधानसभा सीट खाली की थी. इन चारों प्रमुख चेहरों के बैठक में न पहुंचने से कई तरह के कयास लगाए जाने लगे.

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हालांकि, अनुपस्थित रहे नेताओं ने अपनी सफाई में पहले ही पार्टी को सूचित करने की बात कही है. संजय पाटिल ने बताया कि वे विधान परिषद चुनाव की मतगणना और परभणी में उद्धव ठाकरे के आगामी दौरे की तैयारियों में व्यस्त थे. सुनील शिंदे ने कहा कि वे चिपलूण गए थे और मुंबई लौट रहे थे. वहीं संजय पोतनीस ने बैठक में न आने का कोई ठोस कारण तो नहीं बताया, लेकिन यह साफ किया कि वे पूरी तरह से शिवसेना (UBT) के साथ मजबूती से खड़े हैं.

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विपक्ष के नेता पद पर दावा मजबूत

फिलहाल महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना (UBT) के पास 20 विधायक और 6 एमएलसी हैं. बैठक के बाद एकजुटता दिखाने के लिए सभी विधायकों ने उद्धव ठाकरे के साथ एक ग्रुप फोटो भी खिंचवाई. पार्टी के एमएलसी अंबादास दानवे ने बताया कि बैठक में किसानों की समस्याओं, पानी की किल्लत और मुंबई के मुद्दों पर चर्चा हुई. उन्होंने स्पष्ट किया कि शिवसेना (UBT) सदन में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है, इसलिए वे विपक्ष के नेता (LoP) के पद पर अपना दावा बरकरार रखेंगे.

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