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महाराष्ट्र में सूखे से किसान परेशान, मीटिंग में विधायक और मंत्रियों के टेबल पर काजू-बादाम

महाराष्ट्र में एक तरफ किसान बारिश की कमी और सूखे की मार झेल रहे हैं. दूसरी तरफ नांदेड में दुष्काल की समीक्षा बैठक के दौरान नेताओं और अधिकारियों की टेबल पर काजू, बादाम और पिस्ता परोसे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है

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महाराष्ट्र में सूखे से किसान परेशान, मीटिंग में विधायक और मंत्रियों के टेबल पर काजू-बादाम (Photo: News24)

महाराष्ट्र में एक तरफ किसान बारिश की कमी और सूखे की मार झेल रहे हैं. खेतों में खड़ी फसलें संकट में हैं. चारे-पानी की चिंता बढ़ रही है और दूसरी तरफ नांदेड में दुष्काल की समीक्षा बैठक के दौरान नेताओं और अधिकारियों की टेबल पर काजू, बादाम और पिस्ता परोसे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे की मौजूदगी में हुई इस बैठक के कुछ वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आए, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा. NCP-SP विधायक रोहित पवार ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सवाल उठाते हुए दुष्काल पर विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग की.

क्या है मामला?

नांदेड में मराठवाड़ा क्षेत्र की दुष्काल जैसी स्थिति को लेकर समीक्षा बैठक बुलाई गई थी. बैठक में मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. लेकिन बैठक के दौरान टेबल पर रखे काजू-बादाम और पिस्ता ने पूरी चर्चा का रुख बदल दिया. सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब किसान बारिश की कमी से परेशान हैं, फसलें संकट में हैं, ऐसे समय में दुष्काल समीक्षा बैठक में इस तरह का ड्राई फ्रूट सर्व करना कितना उचित है. NCP-SP विधायक रोहित पवार ने पोस्ट कर सरकार से दुष्काल की स्थिति पर गंभीरता से कदम उठाने और विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग की है. वहीं, शिवसेना विधायक हेमंत पाटिल ने काजू-बादाम को लेकर अलग तर्क दिया. उनका कहना है कि टेबल पर रखा गया काजू-बादाम भी किसानों के खेतों से ही आता है और इसे लेने के जरिए एक तरह से किसानों की मदद ही हुई.

NCP ने क्या कहा?

NCP अजीत गुट के विधायक प्रताप पाटिल चिखलीकर ने भी इस विवाद को ज्यादा तूल नहीं देने की बात कही. उनका कहना है कि अगर किसी ने गलती से काजू-बादाम रख दिया तो इसे लेकर इतना हंगामा करने की जरूरत नहीं है. उधर कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने सफाई देते हुए कहा कि कुछ लोगों को शुगर सहित दूसरी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें होती हैं, इसलिए ड्राई फ्रूट्स रखे जाते हैं. हालांकि, इस पूरे मामले पर सवाल अब भी यही है जब बैठक का मुद्दा किसानों का सूखा और उनकी फसल बचाने की चुनौती हो, तो बैठक की मेज पर परोसे गए काजू-बादाम क्या सिर्फ एक सामान्य नाश्ता हैं या फिर यह किसानों की मौजूदा परेशानी के बीच गलत संदेश देने वाला दृश्य है? नांदेड की इस बैठक का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है

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