महाराष्ट्र के लोनावला के पास स्थित ऐतिहासिक 'लोहागढ़ किला' एक बार फिर चर्चाओं में है. हाल ही में यहां एक पर्यटक की मौत के बाद, पुलिस अलग-अलग पहलुओं से इस मामले की जांच कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक युवती ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने मंगेतर को धक्का देकर मर्डर कर दिया. हालांकि, इस दुखद हादसे का किसी अलौकिक शक्ति से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन इसने एक बार फिर लोहागढ़ के सदियों पुराने रहस्यों और लोककथाओं की तरफ लोगों का ध्यान खींच दिया है.
सह्याद्रि पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित लोहागढ़ को लोग एक खूबसूरत ट्रैकिंग डेस्टिनेशन के रूप में जानते हैं. लेकिन मॉनसून के खूबसूरत नजारों और मराठा साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास के पीछे कई ऐसी खौफनाक कहानियां और अनसुलझे रहस्य छिपे हैं, जो दशकों से स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच सुने-सुनाए जाते हैं.
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2000 साल पुराना इतिहास
लोहागढ़ का शाब्दिक अर्थ है 'लोहे का किला'. पुणे जिले में स्थित इस किले का इतिहास करीब 2,000 साल पुराना है, जिसकी शुरुआती नींव सातवाहन काल के दौरान रखी गई थी. 10वीं से 14वीं शताब्दी के बीच इसका और विस्तार हुआ. पश्चिमी घाट के अहम व्यापारिक मार्गों पर नजर रखने के लिए यह एक बेहद रणनीतिक मिलिट्री आउटपोस्ट था. समय के साथ इस पर निजामशाही, बीजापुर सल्तनत और मुगलों का नियंत्रण रहा.
17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसे जीतकर मराठा साम्राज्य का एक मजबूत रक्षा कवच बना दिया. मराठा विजय के बाद इसका उपयोग खजाने और प्रशासनिक केंद्र के रूप में भी किया गया. बाद में यह अंग्रेजों के अधीन चला गया. आज भी पर्यटक इसके विशाल दरवाजों और बिच्छू की पूंछ जैसी दिखने वाली 'विंचू काटा' चट्टान को देखने आते हैं.
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गणेश दरवाजे की खौफनाक दास्तान
किले से जुड़ी कहानियों में सबसे ज्यादा चर्चा 'गणेश दरवाजा' की होती है, जो किले का पहला मुख्य द्वार है. स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, मराठा काल के एक अधिकारी को सपना आया था कि इस दरवाजे की नींव शापित और अस्थिर है. इसे मजबूती देने के लिए 'नरबलि' की सलाह दी गई थी.
दावा किया जाता है कि दरवाजे की नींव को मजबूत करने के लिए एक पुरुष और एक महिला को वहां जिंदा दफन कर दिया गया था. हाल के दिनों में ट्रैवल इन्फ्लुएंसर लियम रिचर्ड्स सहित कई कंटेंट क्रिएटर्स ने इस कहानी को सोशल मीडिया रील्स के जरिए दोबारा जिंदा कर दिया है. एक अन्य कहानी के मुताबिक, पास के गांव में अधिकारों और विशेषाधिकारों के बदले 'सावले' परिवार के एक सदस्य ने यहां आत्मबलिदान दिया था.
इतिहासकारों का क्या है कहना?
इतिहासकार और पुरातत्वविद स्पष्ट करते हैं कि इन कहानियों का कोई लिखित या प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद नहीं है. यह सिर्फ एक मौखिक लोककथा है. दुनिया भर में कई प्राचीन किलों और पुलों के निर्माण के साथ ऐसी ही कहानियां जुड़ी हुई हैं.
सूर्यास्त के बाद रहस्यमयी आवाजें और साये!
लोहागढ़ किले को लेकर ट्रेकर्स और पर्यटकों के बीच कई पैरानॉर्मल कहानियां भी मशहूर हैं. कुछ पर्यटकों का दावा है कि सुबह के वक्त किले की दीवारों पर धुंधले साये चलते हुए दिखाई देते हैं. ऑनलाइन ब्लॉग्स में जिक्र मिलता है कि कुछ अकेले जा रहे पर्यटकों को दूर एक पहरेदार जैसी आकृति दिखी, जिसने इशारा किया और पास जाने पर गायब हो गई.
मॉनसून के दिनों में जब किला भारी धुंध और तेज हवाओं से घिर जाता है, तो लोगों ने यहां सीटी बजने, दूर से किसी के चलने की आवाजें और अजीब सी आवाजें सुनने का दावा किया है. हालांकि, वैज्ञानिकों और जानकारों का कहना है कि किले की बनावट और पहाड़ों की तेज हवाओं के कारण बनने वाले 'इको' की वजह से ऐसा महसूस होता है.