जो रिश्ता एक अरेंज्ड मैरिज के तौर पर शुरू हुआ था, वो अब पुणे के सबसे चौंकाने वाले मर्डर केस में बदल गया है. पुलिस का कहना है कि इसके पीछे बदला लेने, पैसे या पारिवारिक दुश्मनी जैसी कोई वजह नहीं थी, बल्कि वजह था ‘वक्त’. जांच करने वालों के मुताबिक, सिया गोयल ने पुलिस को बताया कि वो रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी. उसे लगा कि अगर केतन की हत्या हो जाती है, तो उसे शादी के बारे में सोचने से पहले कम से कम तीन साल और मिल जाएंगे. पुलिस को शक है कि सिया के बॉयफ्रेंड और इस मामले में सह-आरोपी चेतन चौधरी भी सिया से शादी करने से पहले दो-तीन साल का और समय चाहते थे.
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एक सीक्रेट रिश्ता और एक यात्रा
जांचकर्ताओं का मानना है कि दोनों ने चेतन और सिया ने वो रास्ता चुना जिसे उन्होंने आसान समझा. पुलिस का आरोप है कि तय हुई शादी को रद्द करने और समाज में बदनामी के डर से उन्होंने केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, जांचकर्ताओं को एक ऐसे रिश्ते का पता चला जो सिया की सगाई से पहले का था. पुलिस का कहना है कि फरवरी में केतन से सगाई होने से कुछ हफ़्ते पहले, जनवरी में सिया और चेतन दोस्तों के साथ उदयपुर गए थे और राजस्थान में पांच दिन बिताए थे. माना जाता है कि मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले चेतन की सिया से नज़दीकियां इसी दौरान बढ़ी थीं. जांच में ये भी पता चला है कि चेतन, सिया के परिवार के लिए अनजान व्यक्ति नहीं था. वो सिया के बड़े भाई साहिल गोयल को क्रिकेट के ज़रिए जानता था. जांचकर्ताओं का मानना है कि सिया की चेतन से पहली मुलाकात तब हुई थी जब वो अपने भाई के साथ मैच देखने जाती थी, बाद में दोनों के बीच फिर से संपर्क हुआ.
2,004 कॉल से शक पैदा हुआ
जांच करने वालों का कहना है कि कॉल रिकॉर्ड से पता चलता है कि उनके बीच का रिश्ता बिल्कुल भी मामूली नहीं था. पुलिस का दावा है कि सिया और चेतन ने जनवरी से लेकर अब तक कुल 2,004 फ़ोन कॉल किए और वो कुल मिलाकर 238 घंटे तक बात करते रहे. अधिकारियों का मानना है कि इतनी लंबी बातचीत से साज़िश के बारे में अहम सबूत मिल सकते हैं. इस मामले की एक और अहम कड़ी अब जांच के दायरे में है. पुलिस का कहना है कि केतन की मौत से ठीक एक दिन पहले, 17 जून को सिया और चेतन पुणे के एक कैफ़े में मिले थे. बताया जा रहा है कि ये मुलाक़ात लगभग एक घंटे तक चली, जो शाम करीब 4:30 बजे से 5:30 बजे के बीच हुई थी. जांच करने वाले अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उस मुलाक़ात के दौरान हत्या की साज़िश पर चर्चा हुई थी.
डिजिटल सबूतों पर फोकस
पुलिस को पता चला है कि दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से बातचीत के रिकॉर्ड मिटा दिए थे, इसलिए अब जांच डिजिटल सबूतों पर केंद्रित हो गई है. फोरेंसिक एक्सपर्ट्स वॉट्सऐप चैट, इंस्टाग्राम मैसेज और डिलीट किए गए बाकी रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं. जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने अपराध से पहले और बाद की बातचीत को डिलीट किया, रीसायकल बिन खाली किया और हर संभव डिजिटल निशान मिटाने की कोशिश की. पुलिस अब डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने की कोशिश कर रही है ताकि हत्या तक की टाइमलाइन फिर से तैयार किया जा सके।
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