Mumbai: उद्धव ठाकरे अलोकतांत्रिक ताकतों से लड़ रहे हैं और केंद्रीय एजेंसियां उनकी पार्टी को निशाना बना रही हैं, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोमवार को मुंबई में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात के बाद ये बातें कही। वेणुगोपाल सोमवार शाम ठाकरे के आवास मातोश्री में बैठक के लिए पहुंचे। बैठक में शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत, वरिष्ठ कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट, भाई जगताप और अन्य शामिल रहे। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए वेणुगोपाल ने कहा, 'मैं यहां मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी का संदेश देने आया था। संदेश स्पष्ट है। उद्धव ठाकरे लोकतंत्र विरोधी ताकतों से लड़ रहे हैं। केंद्रीय एजेंसियां शिवसेना (UBT) को निशाना बना रही हैं। विपक्षी दल मिलकर लड़ना चाहते हैं। आम सहमति है। हमारी विचारधाराएं अलग हैं लेकिन साथ मिलकर लड़ने की जरूरत है। और पढ़िए – महाराष्ट्र में हिंदुत्व बनाम बाबरी मस्जिद विध्वंस की सियासत तेज, उद्धव ठाकरे बोले- CM शिंदे मंत्री चंद्राकांत पाटिल को करें बर्खास्त

सोनिया गांधी से मुलाकात के लिए उद्धव को बुलाया दिल्ली

केसी वेणुगोपाल ने कहा कि हमने देखा है कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लोकतंत्र को तोड़ रहे हैं। वेणुगोपाल ने कहा, सभी विपक्षी दलों में पीएम मोदी की तानाशाही के खिलाफ एक साथ लड़ने के लिए आम सहमति है। वेणुगोपाल ने उद्धव ठाकरे को सोनिया गांधी से मिलने के लिए दिल्ली आमंत्रित किया और कहा कि राहुल गांधी जल्द ही मुंबई आ सकते हैं। और पढ़िए – उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे को बनाना चाहते थे CM, शरद पवार ने ‘ऑटोवाला’ कहकर किया था विरोध, MP अरविंद सावंत का खुलासा

उद्धव बोले- लोकतंत्र की लड़ाई हम मिलकर लड़ेंगे

उद्धव ठाकरे ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हमने 25-30 साल तक बीजेपी के साथ संबंध बनाए रखा, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि कौन दोस्त है और कौन विरोधी? उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र की लड़ाई हम मिलकर लड़ेंगे। ठाकरे ने पार्टियों को तोड़ने के भाजपा के प्रयास के बारे में भी बात की। यह अजित पवार के भाजपा में शामिल होने की अटकलों के बीच आया है। बता दें कि शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी का गठन किया, जो पिछले साल जून तक राज्य में सत्ता में थी। पिछले साल जून में ही शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विद्रोह के कारण पार्टी में विभाजन हो गया। शिंदे भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बने और बाद में चुनाव आयोग से शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह भी लिया। और पढ़िए – प्रदेश से जुड़ी अन्य बड़ी ख़बरें यहाँ पढ़ें