प्रतिष्ठित बैंक में सीनियर पोस्ट पर कार्यरत कल्याण ईस्ट के तिसगांव नाका स्थित सहजीवन सोसायटी में रहने वाले एस विश्वनाथ अमीन ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. कुछ दिन पहले ऐस के पैर में एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था. रेबीज का इंजेक्शन (वैक्सीन) भी लगवाया था. इंजेक्शन लगवाने के बावजूद ऐस गहरे तनाव में थे. उन्हें लगातार यह भ्रम हो रहा था कि उनमें रेबीज के लक्षण दिखने लगे हैं. उन्हें डर था कि अगर उन्हें रेबीज हुआ, तो उनके परिवार को काफी परेशानी झेलनी पड़ेगी. इसी डर और मानसिक दबाव के चलते उन्होंने खौफनाक कदम उठा लिया.
शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद महेश गायकवाड़ ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर हर्षल गायकवाड़ से मुलाकात की और उनसे आवारा कुत्तों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की.
---विज्ञापन---
रैबीज बीमारी कितनी खतरनाक?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रेबीज घातक जरूर है, लेकिन PEP यानी सही वैक्सीन कोर्स लेने पर इससे पूरी तरह बचा जा सकता है. मानसिक डर कई बार बीमारी से ज्यादा खतरनाक हो जाता है, इसलिए ऐसे मामलों में डॉक्टर से परामर्श और काउंसिलिंग बहुत जरूरी है. संक्रमण के बाद लक्षण दिखने में 1 से 3 महीने का समय लग सकता है. लक्ष्ण दिखने शुरू हो जाएं तो यह बीमारी गंभीर हो सकती है. यह बीमारी सीधे इंसान के दिमाग और रीढ़ की हड्डी पर हमला करती है. हालांकि बीज के मामले में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है.
---विज्ञापन---
बीमारी के शुरुआती संकेत क्या
बीमारी के शुरुआती लक्ष्णों में काटने वाली जगह पर खुजली, जलन, चुभन या सुन्नपन महसूस होना मुख्य शुरुआती लक्ष्ण है. हल्का बुखार और सिरदर्द रह सकता है. भूख न लगना या गले में खराश और थकान और मांसपेशियों में दर्द भी इस बीमारी के शुरुआती लक्ष्णों में से एक है.