दिशा सालियान मौत मामले में करीब छह साल बाद जांच ने एक नया और बेहद गंभीर मोड़ लिया है. बॉम्बे हाईकोर्ट के 2 सितंबर 2026 के आदेश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 13 सितंबर को इस मामले में रेगुलर FIR दर्ज कर ली है. FIR में आपराधिक साजिश, गैंगरेप, हत्या, सबूत मिटाने, आरोपियों को बचाने के लिए गलत जानकारी देने और सरकारी कर्मचारियों द्वारा रिकॉर्ड में कथित हेरफेर जैसे गंभीर आरोपों के तहत जांच शुरू की गई है. हालांकि FIR बतौर आरोपी किसी का भी नाम दर्ज़ नहीं है. CBI की FIR दिशा सालियान के पिता सतीश ईश्वर सालियान के 11 सितंबर को दर्ज बयान के आधार पर दर्ज हुई है. FIR में घटना की तारीख 8 और 9 जून 2020 की दरम्यानी रात बताई गई है, जबकि घटनास्थल मुंबई के मालवणी, मलाड वेस्ट स्थित रीजेंट गैलेक्सी अपार्टमेंट का फ्लैट नंबर 1202 बताया गया है. मामले की जांच CBI के DSP पूरन कुमार को सौंपी गई है.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने दर्ज की FIR
FIR के मुताबिक, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को क्रिमिनल रिट पिटीशन नंबर 1612/2025 में आदेश दिया था. इसके बाद 11 सितंबर को दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान दर्ज किया गया. बयान में लगाए गए आरोपों और कथित अपराधों की जानकारी के आधार पर CBI ने रेगुलर केस दर्ज कर जांच शुरू की. मामले में IPC की धारा 120-B, 376-D, 302, 201, 217 और 218 लगाई गई हैं. यानी FIR में आपराधिक साजिश, गैंगरेप, हत्या, सबूत गायब करने या आरोपियों को बचाने के लिए गलत जानकारी देने और सरकारी कर्मचारियों द्वारा कानून की अवहेलना करते हुए गलत रिकॉर्ड तैयार करने जैसे आरोपों की जांच की जा रही है.
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4 जून को घर से निकली थीं दिशा, पिता के बयान में क्या है?
दिशा के पिता ने अपने बयान में बताया है कि उनकी बेटी उनकी इकलौती संतान थीं और मौत के समय उनकी उम्र 28 साल थी. वह Kwan Entertainment में सेलिब्रिटी मैनेजर के तौर पर काम करती थीं और सुशांत सिंह राजपूत के साथ भी काम कर चुकी थीं. शिकायत के मुताबिक, 4 जून 2020 को दिशा यह बताकर घर से निकली थीं कि उन्हें एक विज्ञापन शूट के लिए जाना है. इसके बाद वह अपने मंगेतर रोहन रॉय के मालवणी स्थित फ्लैट में गई थीं. 6 जून को दिशा ने अपनी मां से फोन पर बात भी की थी. पिता का कहना है कि उस बातचीत में ऐसा कोई संकेत नहीं था जिससे यह लगे कि दिशा आत्महत्या जैसा कदम उठाने वाली थीं. लेकिन 7 जून से दिशा के नियमित फोन अचानक बंद हो गए. परिवार ने जब उनके मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की तो रोहन रॉय ने फोन उठाकर बताया कि दिशा काम में व्यस्त हैं.
आधी रात के बाद मिली मौत की खबर
FIR में सतीश सालियान ने बताया है कि 9 जून 2020 की रात करीब 3:15 बजे मालवणी पुलिस के एक अधिकारी का फोन आया और उन्हें पुलिस स्टेशन आने के लिए कहा गया. इसके बाद वह अपनी पत्नी के साथ शताब्दी अस्पताल पहुंचे. पिता के मुताबिक, अस्पताल में उन्हें बताया गया कि दिशा की मौत हो चुकी है. वहां मौजूद दोस्तों और कुछ पुलिस अधिकारियों ने घटना को आत्महत्या बताया. उनका कहना है कि उस समय उन्होंने बेटी का शव तक नहीं देखा था और गहरे सदमे में होने के कारण उन्होंने किसी तरह का संदेह व्यक्त नहीं किया. 11 जून को बार-बार आग्रह करने के बाद उन्हें दिशा के शव की तस्वीरें दिखाई गईं. FIR में दावा किया गया है कि तस्वीरों में उन्हें चेहरे और शरीर पर खून या कोई स्पष्ट बड़ी चोट दिखाई नहीं दी. उन्होंने एक छोटे निशान का जिक्र करते हुए आत्महत्या की थ्योरी पर संदेह जताया.
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कभी आत्महत्या तो कभी नशे में गिरने की बात, FIR में उठे सवाल
सतीश सालियान ने आरोप लगाया है कि रोहन रॉय और कुछ पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बताया था कि दिशा ने शराब पी रखी थी और नशे की हालत में इमारत से दुर्घटनावश गिर गईं. पिता के मुताबिक, उस समय वह मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहद परेशान थे. उनके पास घटना से जुड़ी स्वतंत्र जानकारी या दस्तावेज भी नहीं थे, इसलिए उन्होंने उस समय बताई गई कहानी पर भरोसा कर लिया. FIR में यह भी आरोप है कि पुलिस ने अलग-अलग मौकों पर उनसे कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए, लेकिन उनकी सामग्री उन्हें ठीक से पढ़कर या समझाकर नहीं बताई गई. उनका दावा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डेथ सर्टिफिकेट भी उन्हें लंबे समय तक उपलब्ध नहीं कराए गए.
क्या सुशांत सिंह राजपूत से जुड़ा है मौत का तार?
FIR में सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि दिशा को कथित तौर पर कुछ आपत्तिजनक और आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी थी. शिकायतकर्ता के मुताबिक, दिशा ने यह जानकारी सुशांत सिंह राजपूत के साथ साझा की थी और दोनों इसे प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सार्वजनिक करना चाहते थे. पिता ने आरोप लगाया है कि इसी जानकारी को सार्वजनिक होने से रोकने के लिए कथित आपराधिक साजिश रची गई. FIR में दावा किया गया है कि दिशा के साथ गैंगरेप और फिर हत्या की गई तथा पूरी घटना को आत्महत्या का रूप देने के लिए कथित तौर पर सबूतों को नष्ट या बदला गया. इन सभी आरोपों की सत्यता अब CBI जांच के दायरे में है.
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आदित्य ठाकरे समेत कई लोगों की भूमिका की जांच की मांग
सतीश सालियान ने अपनी शिकायत में कई लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है. इनमें आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे, परमबीर सिंह, DCP विशाल ठाकुर, उद्धव ठाकरे और अनिल देशमुख के नाम शामिल हैं. इसके अलावा मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारियों, पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टरों और कर्मचारियों, फॉरेंसिक साइंस लैब के अधिकारियों, रीजेंट गैलेक्सी के सुरक्षा गार्ड, कुछ अन्य व्यक्तियों और SIT के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है.
CCTV फुटेज ने भी खड़े किए सवाल
FIR में पहले की जांच में सामने आई कहानी और CCTV फुटेज के बीच कथित विरोधाभास का भी जिक्र किया गया है. शिकायतकर्ता के मुताबिक, पहले यह दावा किया गया था कि 4 जून से दिशा फ्लैट या बिल्डिंग से बाहर नहीं निकली थीं. लेकिन FIR में कहा गया है कि CCTV फुटेज में 8 जून की रात करीब 8:15 बजे दिशा को फ्लैट नंबर 1101 की तरफ जाते या उसमें प्रवेश करते हुए दिखाया गया है. इसके अलावा FIR में दावा किया गया है कि रात करीब 12:55 बजे रोहन रॉय, प्रीति राणे, सुरक्षा गार्ड मुन्ना और पुलिसकर्मी लिफ्ट से फ्लैट नंबर 1202 की ओर जाते दिखाई देते हैं. शिकायतकर्ता ने इस घटनाक्रम को उस कथित बयान से जोड़ते हुए सवाल उठाया है, जिसमें दिशा के करीब 1:16 बजे तक फोन पर बात करने और करीब 1:20 बजे इमारत से छलांग लगाने की बात कही गई थी.
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शव, कपड़ों और सीन रीकंस्ट्रक्शन को लेकर भी सवाल
FIR में दिशा के शव की स्थिति, कपड़ों और पोस्टमार्टम रिकॉर्ड को लेकर भी कथित विसंगतियों का जिक्र है. शिकायतकर्ता के मुताबिक, अस्पताल के एक रिकॉर्ड में शव को निर्वस्त्र बताया गया था, जबकि बाद के रिकॉर्ड में शव के साथ कपड़ों का उल्लेख किया गया. कपड़ों के रंग और विवरण को लेकर भी अलग-अलग रिकॉर्ड होने का दावा किया गया है. इसके अलावा FIR में कहा गया है कि दिशा का शव बिल्डिंग से करीब 25 फीट दूर गिरा था. शिकायतकर्ता का दावा है कि बाद में किए गए सीन रीकंस्ट्रक्शन और डमी टेस्ट में ऐसी लैंडिंग दोबारा नहीं हो सकी. FIR में इस रीकंस्ट्रक्शन की रिकॉर्डिंग या वीडियोग्राफी के रिकॉर्ड के गायब होने का आरोप भी लगाया गया है.
दिशा के मोबाइल फोन को लेकर भी CBI जांच
दिशा के मोबाइल फोन को लेकर भी FIR में कई सवाल उठाए गए हैं. शिकायतकर्ता के मुताबिक, अलग-अलग बयानों में यह सामने आया कि पुलिस ने 9 जून 2020 को सुबह करीब 9:40 बजे दिशा का मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया था. लेकिन बाद में सामने आई मीडिया रिपोर्टों में मोबाइल के सक्रिय रहने और उसके इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई. FIR में आरोप लगाया गया है कि मोबाइल की जब्ती से जुड़े रिकॉर्ड को बाद में दबाया या नष्ट किया गया और जब्ती की तारीख व परिस्थितियों को लेकर अलग रिकॉर्ड तैयार किया गया. शिकायतकर्ता ने मोबाइल से जुड़े डेटा और कम्युनिकेशन को डिलीट, बदलने या प्रभावित करने का भी आरोप लगाया है. उनका कहना है कि ऐसा किए जाने से घटना से जुड़े संभावित गवाहों और महत्वपूर्ण जानकारी तक पहुंच प्रभावित हुई.
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फॉरेंसिक स्वैब को लेकर FIR में गंभीर दावे
FIR का एक अहम हिस्सा मेडिकल और फॉरेंसिक रिकॉर्ड से जुड़ा है. शिकायतकर्ता के मुताबिक, मेडिकल और पुलिस रिकॉर्ड में वजाइनल और एनल स्वैब लिए जाने तथा उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने का उल्लेख है. FIR में PSI अशोक देवधरे के 12 और 16 जून 2020 के कम्युनिकेशन तथा DCP विशाल ठाकुर के 3 अगस्त 2020 के पत्र का भी हवाला दिया गया है. शिकायतकर्ता के अनुसार, इन दस्तावेजों में स्वैब की फॉरेंसिक जांच का उल्लेख था. इसके बाद 28 अगस्त 2020 की एक रिपोर्ट में स्वैब की जगह स्मीयर स्लाइड का उल्लेख किए जाने का दावा FIR में किया गया है. पोस्टमार्टम डॉक्टर डॉ. धनराज जाधव ने 25 सितंबर 2020 के पत्र में 'स्वैब' का उल्लेख गलती बताया था. लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, Cause of Death Certificate और पुलिस के अन्य रिकॉर्ड में स्वैब का उल्लेख होने के कारण इस पूरे मामले की दोबारा जांच जरूरी है.
2023 की SIT जांच में भी स्वैब का जिक्र
FIR में 24 दिसंबर 2023 को SIT के सामने PSI अशोक देवधरे के दर्ज बयान का भी उल्लेख है. शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस बयान में भी उन्होंने वजाइनल और एनल स्वैब लिए जाने और फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने की बात कही थी. FIR में 6 अगस्त 2020 की एक अखबार की रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है, जिसमें फॉरेंसिक अधिकारियों द्वारा स्वैब प्राप्त किए जाने की बात कथित तौर पर कही गई थी. अब CBI की जांच में इन मेडिकल और फॉरेंसिक रिकॉर्ड के बीच कथित अंतर की भी पड़ताल की जाएगी.
मोबाइल टावर लोकेशन और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पर भी सवाल
FIR में आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली से जुड़े मोबाइल टावर और लोकेशन रिकॉर्ड का भी जिक्र है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि ये रिकॉर्ड जांच एजेंसी के पास उपलब्ध थे, लेकिन बाद में जांच से जुड़े कागजात में नहीं मिले. FIR में यह पता लगाने की मांग की गई है कि ये रिकॉर्ड किसने हटाए या दबाए, किसके निर्देश पर ऐसा किया गया और इससे किसे फायदा हुआ. सतीश सालियान का दावा है कि करीब पांच साल तक उन्हें इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जानकारी नहीं दी गई. उनका कहना है कि 2025 में कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद उन्हें पहली बार बेटी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी मिली.
2023 में SIT बनने के बाद बढ़ा था शक
FIR के मुताबिक, 14 दिसंबर 2023 को सतीश सालियान को मालवणी पुलिस स्टेशन बुलाया गया था. वहां उन्हें बताया गया कि दिशा की मौत से जुड़ा नया सबूत सामने आया है और आगे की जांच के लिए SIT बनाई गई है. पिता के मुताबिक, उन्होंने उसी समय पुलिस को बताया था कि उन्हें बेटी की मौत की परिस्थितियों पर गंभीर संदेह है. उन्होंने आशंका जताई थी कि दिशा के साथ गैंगरेप के बाद हत्या की गई और उसकी मौत को आत्महत्या का रूप दिया गया. सतीश सालियान का कहना है कि मीडिया रिपोर्टों में सामने आए दावों और जानकारियों के बाद उनका संदेह और मजबूत हुआ.
अब CBI जांच से क्या सामने आएगा?
दिशा सालियान की मौत को लेकर पिछले कई वर्षों से अलग-अलग दावे और सवाल सामने आते रहे हैं. अब CBI द्वारा दर्ज की गई FIR ने इस मामले की जांच को एक नए चरण में पहुंचा दिया है. CCTV फुटेज, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, मेडिकल एवं फॉरेंसिक दस्तावेज, पोस्टमार्टम रिकॉर्ड, सीन रीकंस्ट्रक्शन और पुलिस जांच के दौरान तैयार किए गए दस्तावेज, इन सभी पहलुओं की जांच अब CBI के सामने महत्वपूर्ण होगी. सबसे बड़ा सवाल यही है कि FIR में लगाए गए गंभीर आरोपों के पीछे कितनी सच्चाई है और जांच में कौन-से तथ्य सामने आते हैं. CBI की जांच आगे बढ़ने के साथ इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है.