धुले डेढ़ साल से फाइलों में अटके करीब 40 करोड़ रुपये… बैंक के नोटिस, मजदूरों की बकाया मजदूरी और रोज बढ़ता आर्थिक दबाव… आखिरकार महाराष्ट्र के धुले के वॉटर सप्लाई कॉन्ट्रैक्टर्स का सब्र टूट ही गया. जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव पानी पहुंचाने वाले यही ठेकेदार अब खुद प्यासे सिस्टम के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं.
जिला परिषद के CEO ऑफिस के बाहर ठिय्या आंदोलन कर रहे कॉन्ट्रैक्टर्स का कहना है “हमने सरकार का काम ईमानदारी से किया, लेकिन सरकार ने हमें ही भूल गया.” गुस्से और बेबसी के बीच ठेकेदारों ने साफ चेतावनी दी है अगर जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो 1 मई से गांवों की जल आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी जाएगी.
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दरअसल, 15 अप्रैल से ही जिले में जल आपूर्ति से जुड़े तमाम काम ठप पड़े हैं. लेकिन भुगतान की कोई हलचल न देखकर कॉन्ट्रैक्टर्स एकजुट होकर सड़क पर उतर आए. प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई, और हर आवाज में एक ही दर्द था “काम हमने किया, कीमत हम चुका रहे हैं!”
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कॉन्ट्रैक्टर्स का आरोप है कि फंड की कमी का हवाला देकर उनके करोड़ों रुपये रोके गए हैं, जबकि दूसरी तरफ टेंडर की शर्तों का हवाला देकर उनके बिल से “पब्लिक कंट्रीब्यूशन” के नाम पर कटौती भी कर ली गई. “ना पूरा पैसा मिला, ना साफ जवाब” यही उनकी सबसे बड़ी शिकायत है.
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प्रदर्शन कर रहे ठेकेदारों ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं
जल जीवन मिशन के कामों के लिए तुरंत फंड जारी किया जाए, 100% बकाया भुगतान बिना देरी के किया जाए, अधूरे प्रोजेक्ट्स को बिना पेनल्टी के मार्च 2028 तक पूरा करने की मोहलत दी जाए और बिल से काटी गई पब्लिक कंट्रीब्यूशन की रकम वापस की जाए.
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कॉन्ट्रैक्टर्स का कहना है कि अगर यही हाल रहा, तो सिर्फ उनका ही नहीं, बल्कि गांवों की पानी व्यवस्था भी चरमरा जाएगी. “हम काम बंद कर चुके हैं, अब अगर सरकार नहीं जागी, तो पानी भी रुक जाएगा”— यह चेतावनी अब सिर्फ बयान नहीं, बल्कि आने वाले संकट का संकेत है.
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इस आंदोलन में संघ के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ठेकेदार शामिल हुए, जिनके चेहरों पर गुस्सा कम और बेबसी ज्यादा साफ नजर आई.