Dharavi Redevelopment Project: देश के मशहूर बिजनेसमैन गौतम अदाणी से जुड़ी धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट कंपनी ANDPL ने कहा कि इस प्रोजेक्ट में सहयोग करने वाले स्थानीय निवासियों को पूरा ट्रांजिट किराया और शिफ्टिंग का फायदा मिलता रहेगा, जबकि कम पेमेंट सिर्फ उन मामलों में लागू होगा जहां परिवार जानबूझकर अपने घर खाली करने में देरी करते हैं.
घर खाली करने में देरी से जुड़ा फैसला
ANDPL के मुताबिक ये फैसला रिलोकेशन प्रोसेस के दौरान हाल के तजुर्बों के आधार पर लिया गया है. एक मामले में 16 परिवारों को घर तोड़ने का नोटिस दिया गया था. धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट (DRP) की काउंसलिंग के बाद 12 परिवारों ने अपनी मर्जी से घर खाली कर दिए. बाकी 4 मामलों में जगह खाली कराने के लिए पुलिस की मदद लेनी पड़ी.
85 झोपड़ियों वाले एक और मामले में काउंसलिंग के बाद सभी परिवार बिना किसी जबरदस्ती के अपनी मर्जी से चले गए. प्रोजेक्ट अथॉरिटी ने कहा कि ऐसे मामलों से पता चलता है कि ज्यादातर निवासी सहयोग कर रहे हैं, लेकिन कुछ मामलों की वजह से काम में देरी हो सकती है. ANDPL के प्रवक्ता ने कहा कि जब प्रोजेक्ट वाली जगहों पर लोग रह रहे हों, तो कंस्ट्रक्शन और रिहैबिलिटेशन का काम आगे नहीं बढ़ सकता. देरी होने से लेबर, इक्विपमेंट और प्रोजेक्ट से जुड़े दूसरे खर्च भी बढ़ जाते हैं.
एलिजिबल रेजिडेंट के लिए रिहैबिलिटेशन के फायदे
धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का मकसद एलिजिबल रेजिडेंट और बिजनसेज को रिहायशी, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल फायदे देना है. तय रिहैबिलिटेशन फ्रेमवर्क के तहत ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले वो योग्य निवासी जिनके घर 1 जनवरी 2000 को या उससे पहले बने थे, उन्हें धारावी के अंदर बिना किसी पेमेंट के 350 स्क्वेयर फीट के घर मिलेंगे.
जो लोग 2000 से 2011 के बीच की कैटेगरी में आते हैं, वो 2.5 लाख रुपये के पेमेंट पर मुंबई में 300 स्क्वेयर फीट के घर पाने के लिए एलिजिबल हैं. 1 जनवरी 2011 के बाद आए निवासी और ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले वो योग्य निवासी जिनके घर 15 नवंबर 2022 तक बने थे, उन्हें धारावी के बाहर सस्ते किराए वाले घरों के इंतजाम के तहत जगह मिलेगी.
कानूनी प्रावधानों का जिक्र
ANDPL ने कहा कि कम ट्रांजिट किराया रखने का मकसद जानबूझकर रुकावट डालने से रोकना है. इसमें महाराष्ट्र स्लम एरियाज एक्ट, 1971 की धारा 33 और 38 के साथ-साथ DCPR 2034 के रेगुलेशन 33(10A) के प्रावधानों का हवाला दिया गया. कंपनी ने कहा कि ऐसे मामलों में भी ट्रांजिट किराया कम दरों पर दिया जाता रहेगा, जिससे पुलिस की तैनाती, लेबर और इक्विपमेंट जैसे एडिशनल खर्चों का कुछ हिस्सा कवर हो सके.
रिवाइज्ड पेमेंट क्या हैं?
- सहयोग न करने वाले ग्राउंड-फ्लोर के निवासियों को 18000 रुपये के बजाय 15000 रुपये हर महीने मिलेंगे.
- सहयोग न करने वाले ऊपरी मंजिल के निवासियों को 15000 रुपये के बजाय 12000 रुपये हर महीने मिलेंगे.
- सहयोग न करने वाले कमर्शियल और इंडस्ट्रियल कब्जेदारों को 175 रुपये प्रति वर्ग फीट के बजाय 145 रुपये प्रति वर्ग फीट मिलेंगे.
- सहयोग न करने वाले परिवारों को 5,000 रुपये का एकमुश्त शिफ्टिंग अलाउंस नहीं मिलेगा.