महाराष्ट्र में चुनावी माहौल के बीच कांग्रेस ने बड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाया है. पार्टी ने अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई अंबरनाथ नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार होने के बावजूद बीजेपी के साथ कथित गठबंधन करने के आरोपों के बाद की गई है. कांग्रेस नेतृत्व ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी लाइन से हटकर कोई भी फैसला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस कदम को चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
अंबरनाथ में कांग्रेस और अकोट में AIMIM के साथ स्थानीय निकाय चुनावों के लिए BJP के गठबंधन के बाद, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा, ‘BJP से पूछना चाहिए कि उन्होंने ये गठबंधन कैसे किए. उनके नेताओं ने सत्ता के लिए ये गठबंधन किए होंगे. BJP के सीनियर नेताओं को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए.’
बिना जानकारी गठबंधन बना विवाद की वजह
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि प्रदीप पाटिल ने पार्टी नेतृत्व को बिना बताए ऐसे कदम उठाए जो कांग्रेस की विचारधारा और संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ हैं. पत्र में बताया गया कि अंबरनाथ नगर पालिका चुनाव कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर लड़े गए थे और पार्टी के 12 उम्मीदवार जीतकर आए. इसके बावजूद बीजेपी पार्षदों के साथ गठबंधन की खबरें सामने आईं. सबसे गंभीर बात यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पार्टी कार्यालय को मीडिया के माध्यम से मिली. कांग्रेस ने इसे संगठनात्मक मर्यादा का सीधा उल्लंघन माना है.
यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र के अंबरनाथ में BJP के गठबंधन पर भड़के फड़णवीस, कांग्रेस-AIMIM के साथ मिलाया था हाथ
पार्टी विरोधी गतिविधि बताकर की कार्रवाई
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गणेश पाटिल की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि प्रदीप पाटिल का आचरण पार्टी विरोधी है और इससे कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचा है. पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह कदम कांग्रेस के सिद्धांतों और अनुशासन के खिलाफ है. प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है. सिर्फ प्रदीप पाटिल को ही नहीं बल्कि अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की पूरी कार्यकारिणी को भी भंग कर दिया गया है. पार्टी ने साफ कर दिया है कि अनुशासन तोड़ने वालों के लिए कोई नरमी नहीं होगी.
अन्य नेताओं पर भी हो सकती है कार्रवाई
कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस कथित गठजोड़ में जो भी नगरसेवक या पदाधिकारी शामिल पाए जाएंगे उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी. अंबरनाथ नगर पालिका को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है. कांग्रेस नेतृत्व नहीं चाहता कि स्थानीय स्तर पर कोई नेता बीजेपी या अन्य दलों के साथ समझौता कर पार्टी की रणनीति को कमजोर करे. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला कांग्रेस का सख्त संदेश है कि पार्टी अनुशासन सर्वोपरि है और आने वाले समय में ऐसे मामलों पर और भी सख्ती देखने को मिल सकती है.
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