7वीं के छात्र ने 100 रुपये दी लड़की का रेप-मर्डर की सुपारी, पैसे लेकर खोल दी पोल

Class 7th Student Pays Rs 100 Supari to Rape Classmate: पुणे शहर के फेमस इंग्लिश मीडियम स्कूल में कक्षा 7 के अपनी ही एक क्लासमेट का रेप और हत्या करने के लिए कक्षा 9 के एक छात्र को 100 रुपये की सुपारी दी।

Class 7th Student Pays Rs 100 Supari to Rape Classmate
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Class 7th Student Pays Rs 100 Supari to Rape Classmate: महाराष्ट्र के पुणे शहर से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां शहर के एक बाहरी इलाके में दौंड में स्थित फेमस इंग्लिश मीडियम स्कूल में कक्षा 7 के एक छात्र ने अपनी ही एक क्लासमेट का रेप और हत्या करने के लिए कक्षा 9 के एक छात्र को 100 रुपये की सुपारी दी। हालांकि, पैसे पाने वाले छात्र ने इस बारे में स्कूल प्रशासन को बता दिया, साथ ही उसने 7 के छात्र की सारी प्लानिंग के बारे में बताया। इस मामले में रविवार को दौंड पुलिस ने स्कूल के प्रिंसिपल और 2 टीचर्स के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

स्कूल के खिलाफ शिकायत

लड़की के पिता ने इस मामले को लेकर स्कूल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में लड़की के पिता ने स्कूल पर आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन ने 100 रुपये की सुपारी देने वाले कक्षा 7वीं के छात्र के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।

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छात्र ने 100 रुपये की सुपारी

इस मामले को लेकर पुलिस ने बताया कि कक्षा 7वीं का छात्र अपनी एक क्लासमेट से नाराज था, क्योंकि उसने क्लास टीचर्स को बता दिया था कि लड़के ने अपने रिपोर्ट कार्ड पर अपने माता-पिता की नकली साइन की हैं। अपनी इस क्लासमेट को सबक सिखाने के लिए उसने कक्षा 9वीं के एक छात्र को 100 रुपये की सुपारी दी और उस लड़की का रेप कर उसे जान से मारने को कहा।

रविवार को दर्ज हुई FIR

लड़की के माता-पिता का आरोप है कि मामला पब्लिक होने के बाद भी स्कूल ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया। इसके अलावा, उनकी कई शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया। स्कूल ने आरोपी लड़के को सिर्फ डांट-फटकार कर छोड़ दिया। उन्होंने 23 नवंबर को इस मामले में पुलिस से संपर्क किया और उनके लगातार संपर्क में रहने के बाद ही पुलिस ने इस रविवार को FIR दर्ज की।

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रविवार को हेडमास्टर और दो शिक्षकों पर किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 और भारतीय दंड संहिता की धारा 3 (5) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस की कार्रवाई

दौंड पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर गोपाल पवार ने कहा कि दो शिक्षकों और प्रधानाध्यापक को स्थिति के बारे में पता था, लेकिन उन्होंने मामले की सूचना उन्हें नहीं दी, जिसके कारण उन पर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया। लड़के के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है क्योंकि वह अभी 12 साल का नहीं है और किशोर न्याय अधिनियम 12 साल से कम उम्र के बच्चों के खिलाफ किसी भी आपराधिक कार्रवाई की अनुमति नहीं देता है।

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