MHA Terrorist List: आतंकवाद के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को और मजबूत करते हुए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कार्रवाई करते हुए 23 खूंखार अपराधियों को आधिकारिक रूप से 'आतंकवादी' घोषित कर दिया है. सरकार के इस कड़े फैसले से सीमा पार बैठे भारत विरोधी तत्वों में खलबली मच गई है. गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इस लिस्ट में शामिल सभी 23 आतंकी लंबे समय से भारत विरोधी साजिशों में लिप्त रहे हैं. ये सभी आरोपी भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने, युवाओं को भड़काने, हथियारों की अवैध तस्करी, सीमा पार से घुसपैठ कराने, आतंकी संगठनों की मदद करने और टेरर फंडिंग (आतंक के लिए पैसा जुटाना) जैसी खतरनाक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे.
17 पाकिस्तानी और 6 भारतीय नागरिक
जांच एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद गृह मंत्रालय ने यह कार्रवाई की है. घोषित किए गए इन 23 आतंकियों में से 17 पाकिस्तान के नागरिक हैं, जबकि 6 भारतीय नागरिक हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि ये सभी 6 भारतीय भी इस समय पाकिस्तान या पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में शरण लिए हुए हैं और वहीं से बैठकर भारत के खिलाफ आतंकी नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं.
आतंकी नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने का संकल्प
UAPA के तहत किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से आतंकवादी घोषित करने के बाद सुरक्षा एजेंसियों को उनकी संपत्तियां जब्त करने और उनके वित्तीय लेन-देन को पूरी तरह से ब्लॉक करने का अधिकार मिल जाता है. केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. भारत और उसके नागरिकों की रक्षा के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को पूरी तरह से नेस्तनाबूद किया जाएगा और आने वाले दिनों में भी यह सख्ती जारी रहेगी.
क्या है भारत की आतंकवाद विरोधी नीति?
भारत की आतंकवाद विरोधी नीति मुख्य रूप से 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) के सिद्धांत पर काम करती है, जिसका सीधा मतलब है कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस नीति के तहत सरकार दो स्तरों पर काम करती है। पहला—देश के भीतर UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) और NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) जैसे सख्त कानूनों के जरिए आतंकियों और उनके वित्तीय नेटवर्क को पूरी तरह ब्लॉक करना। दूसरा—सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और आतंकी मॉड्यूल को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों द्वारा लगातार प्रोएक्टिव (सक्रिय) ऑपरेशन चलाना। इसका एकमात्र उद्देश्य भारत के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।