महाराष्ट्र ट्रांसपोर्टर्स एक्शन कमिटी (M-TS) ने कल से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है. 2 मार्च को MSRTC मुख्यालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में ठोस लिखित आश्वासन न मिलने के बाद संगठन ने आजाद मैदान पर विशाल धरना देने का फैसला किया. यह आंदोलन केवल भारी ट्रकों तक सीमित नहीं, बल्कि स्कूल बसें, निजी पर्यटक बसें, टेम्पो, टैक्सी और ऑटो रिक्शा सहित पूरे परिवहन तंत्र को प्रभावित करेगा. यात्रियों, छात्रों और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर गहरा संकट मंडरा रहा है.
ई-चालन प्रथा बनी हड़ताल का मुख्य कारण
इस 'जन आंदोलन' का मूल कारण ई-चालान व्यवस्था पर सरकारी मनमानी है. उच्चस्तरीय समिति के प्रमुख सदस्य मलकीत सिंह बाल ने बताया कि गत वर्ष 17 दिसंबर को सौंपी गई विस्तृत सिफारिश रिपोर्ट पर सरकार ने एक भी सुधार लागू नहीं किया. ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि एक ही उल्लंघन पर दिन में कई चालान काटे जा रहे हैं, जबकि पार्किंग सुविधा न होने पर 'नो पार्किंग' का जुर्माना वसूला जा रहा. संगठन ने इसे विधि-विरुद्ध वित्तीय उत्पीड़न करार दिया, जो व्यावसायिक वाहन चालकों से लेकर सड़क पर हर नागरिक को निशाना बना रहा.
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कब तक चलेगी हड़ताल?
परिवहन मंत्री प्रताप सरणाईक ने कहा कि सरकार मुद्दों के समाधान के प्रति सकारात्मक है, लेकिन एम-टीएसी मौखिक वादों पर भरोसा नहीं कर रहा. आज शाम 5:30 बजे परिवहन आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ निर्णायक बैठक होनी है. सरकार ने 6 मार्च को 'क्लीनर अधिसूचना' जारी करने और सीएम के स्तर पर बॉर्डर चेकपोस्ट बंद करने पर फैसला होने का संकेत दिया. संगठनों ने स्पष्ट किया कि हड़ताल तब तक चलेगी जब तक सरकारी रेजोल्यूशन (जीआर) पर हस्ताक्षर न हो.
इन चीजों पर पड़ सकता है प्रभाव
अगर आज की वार्ता विफल रही तो प्रभाव गंभीर होगा. बोर्ड परीक्षाओं के बीच मुंबई स्कूल बस एसोसिएशन के शामिल होने से छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. सब्जी, दूध व ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन 48-72 घंटों में बाधित हो जाएगी. ऐप-आधारित कैब व ऑटो पर निर्भर शहरवासी महंगे किराए या सेवाओं की कमी से जूझेंगे, जिससे मुंबई-पुणे जैसे महानगरों में 'लास्ट माइल' कनेक्टिविटी ठप हो जाएगी. एम-टीएसी की मांगें स्पष्ट हैं. अनुचित व समयसीमा ओझल चालानों रद्द करने, अदालती सुनवाई के लिए 50 प्रतिशत जमा नियम समाप्त करने, पार्किंग स्थल व कार्गो जोन बनने तक 'नो पार्किंग' जुर्माने पर रोक, वाहन क्लीनरों की अधिसूचना व बॉर्डर चेकपोस्ट बंद करने का फैसला और परिवहन विवादों के लिए अलग न्यायपालिका या ट्रिब्यूनल की स्थापना शामिल.
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