करीब दो दशक तक चले संघर्ष, जनआंदोलन और कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार मुंबई से सटे, डोंबिवली के प्राचीन पिंपलेश्वर महादेव मंदिर को उसकी बहुप्रतीक्षित भूमि मिल गई है. महाराष्ट्र सरकार ने मंदिर के लिए 4 एकड़ 25 गुंठा जमीन मंजूर कर दी है. इस फैसले के बाद शिवभक्तों और स्थानीय नागरिकों में उत्साह का माहौल है. मंदिर परिसर में इसे आस्था, धैर्य और संघर्ष की ऐतिहासिक जीत के रूप में देखा जा रहा है. भूमि हस्तांतरण के फैसले के बाद महाराष्ट्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और डोंबिवली के विधायक रविंद्र चव्हाण अपनी धर्मपत्नी के साथ पिंपलेश्वर मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने संकल्प पूर्ति पूजन कर भगवान महादेव का आशीर्वाद लिया. इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महायुति सरकार की इच्छाशक्ति के चलते वर्षों से लंबित यह मुद्दा आखिरकार सुलझ सका.

8 जून को जुटेगा महाराष्ट्र का राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व


मंदिर को भूमि मिलने की खुशी में 8 जून को मंदिर परिसर में भव्य शिवोत्सव, भजन-कीर्तन महोत्सव और कृतज्ञता समारोह का आयोजन किया जाएगा. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे, उद्योग मंत्री उदय सामंत समेत राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे. कार्यक्रम के दौरान विशेष पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और सामूहिक प्रार्थना का आयोजन भी किया जाएगा.

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20 साल की लड़ाई, आंदोलन और इंतजार का अंत


पिंपलेश्वर मंदिर की भूमि का मुद्दा पिछले करीब 20 वर्षों से चर्चा और संघर्ष का विषय बना हुआ था. मंदिर को उसकी अधिकारयुक्त भूमि दिलाने के लिए ग्राम सभाओं से लेकर सरकारी बैठकों तक लगातार आवाज उठाई जाती रही. कानूनी प्रक्रियाओं और जनआंदोलनों के माध्यम से भी इस मांग को मजबूती से रखा गया. आंदोलन को धार देने के लिए 20 अगस्त 2012 को भाजपा ने डोंबिवली बंद का भी आह्वान किया था. लंबे संघर्ष के बाद अब सरकार द्वारा भूमि देवस्थान को सौंपे जाने का रास्ता साफ हो गया है, जिससे हजारों श्रद्धालुओं की वर्षों पुरानी मांग पूरी होती नजर आ रही है.

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‘यह सिर्फ जमीन नहीं, शिवभक्तों की आस्था की जीत है’


इस मौके पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने कहा कि पिंपलेश्वर महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र है. मंदिर को उसकी भूमि मिलने से भविष्य में श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं के विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा. उन्होंने कहा कि यह सफलता भगवान महादेव की कृपा, शिवभक्तों के विश्वास और जनता के निरंतर समर्थन का परिणाम है.

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8 जून को होने वाला शिवोत्सव अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि 20 वर्षों के संघर्ष की विजयगाथा और आस्था के सम्मान का उत्सव बनने जा रहा है. मंदिर प्रशासन और आयोजकों को उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर इस पल के साक्षी बनेंगे.