महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर बना तनाव फिलहाल सुलझ गया है. भूख हड़ताल पर बैठे 44 वर्षीय कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने 20 दिनों के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है. दिलचस्प बात यह रही कि इस पूरे गतिरोध को शांत करने की रणनीति भारत से हजारों किलोमीटर दूर फ्रांस की राजधानी पेरिस से तय की गई. पेरिस में मौजूद महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने मनोज जरांगे के 20 दिन का अनशन तोड़ने तोड़ने में अहम भूमिका निभाई.
पेरिस से हुई 'सीक्रेट डिप्लोमेसी'
मंत्री उदय सामंत एक स्पेस कॉन्फ्रेंस के सिलसिले में पेरिस में थे. भूख हड़ताल और आंदोलनकारियों के प्रस्तावित मुंबई मार्च की वजह से राज्य में स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई थी. ऐसे में उदय सामंत ने पेरिस से ही मोर्चा संभाला. वहां से उन्होंने राज्य सरकार के शीर्ष नेताओं, मंत्रियों और मनोज जरांगे पाटिल की टीम के साथ फोन पर लगातार समन्वय स्थापित किया. सूत्रों के अनुसार, उन्होंने मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों से सात बार फोन पर बातचीत की.
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साढ़े तीन घंटे की कॉन्फ्रेंस कॉल से निकला रास्ता
इसके बाद उदय सामंत ने एक अहम कॉन्फ्रेंस कॉल आयोजित की. इस कॉल में मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्री, मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और भाजपा नेता प्रसाद लाड जुड़े. लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली इस बातचीत और पर्दे के पीछे की कूटनीति ने पूरे मामले का रुख मोड़ दिया. इस बैठक का मुख्य मकसद जरांगे पाटिल की लंबित मांगों पर विचार करना, भविष्य की रणनीति बनाना और पूरे मामले को बिना किसी टकराव के शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाना था.
गणेशोत्सव की भीड़ और मुंबई मार्च की चुनौती
सरकार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी थी. एक तरफ जरांगे पाटिल से बातचीत का रास्ता खुला रखना था तो दूसरी तरफ यह पक्का करना था कि उनके मुंबई कूच के ऐलान से कानून-व्यवस्था न बिगड़े. गणेशोत्सव के कारण मुंबई में पहले से ही भारी भीड़ थी, ऐसे में टकराव टालना बेहद जरूरी था.
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सरकार ने जरांगे पाटिल के करीबी सहयोगियों से सीधा संपर्क साधा और उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला लेने का पक्का भरोसा दिया. इस 'सीक्रेट डिप्लोमेसी' के असर से जरांगे पाटिल ने अनशन समाप्त किया और राज्य सरकार के सामने से मुंबई मार्च का बड़ा संकट टल गया.
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