MP News: मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंदर चीतों की मौत के मामलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोजेक्ट चीता की प्रगति की समीक्षा के लिए बुधवार को दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। जिसमें केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव समेत कई नेता शामिल होंगे।
भूपेंद्र यादव को सौंपी है जिम्मेदारी
वहीं चीतों की लगातार होती मौत को लेकर केंद्र ने पांच वन्यजीव विशेषज्ञों की एक टीम कूनो भेज दी है। टीम में गुजरात से मोहन राम, ओडिशा से मनोज नायर, कर्नाटक से दीप कॉन्ट्रैक्टर और एन.एस. शामिल हैं। भारत सरकार से मुरली और वी. हरिनी कूनो में निरीक्षण करेंगे। केंद्र ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री (एमओईएफसीसी) भूपेन्द्र यादव को कूनो पर लगातार निगरानी करने का काम सौंपा दिया है।
तीन चीते मिले घायल
बता दें कि एक सप्ताह में दो चीतों की मौत के बाद अब कूनो में तीन चीते और संक्रमित मिले हैं, चीते ओबान का कॉलर आईडी हटाया तो गहरा घाव मिला है। इसके अलावा दोनों संक्रमित चीतों एल्टन और फ्रेडी को बेहोश करने की कोशिश जारी है। इसके पहले बीते एक सप्ताह में दो चीतों की मौत हो चुकी है।
सीएम शिवराज ने भी समीक्षा बैठक
वहीं मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी चीता पुनर्वास प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक की है। सीएम ने कहा कि 'चीता पुनर्वास प्रोजेक्ट में कूनो राष्ट्रीय उद्यान में लाए गए चीतों में से कुछ चीतों की मृत्यु, चिंता का विषय है। उनके स्वास्थ्य और देखभाल के लिए केन्द्र सरकार द्वारा गठित चीता टास्क फोर्स को राज्य शासन की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाए। क्षेत्र में पर्याप्त वन्य-प्राणी चिकित्सकों सहित सभी आवश्यक दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही चीतों की स्थिति की नियमित समीक्षा की व्यवस्था हो। आवश्यकता होने पर फॉरेस्ट गार्ड की संख्या और पुनर्वास प्रोजेक्ट के लिए उपलब्ध क्षेत्र में वृद्धि की जाए।।'
24 घंटे हो निगरानी
बता दें कि चीता परियोजना का क्रियान्वयन केन्द्र सरकार द्वारा गठित चीता टास्क फोर्स के निर्णयों के अनुसार किया जाता है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से 8 और दक्षिण अफ्रीका से 12 इस प्रकार कुल 20 चीते लाए गए। वर्तमान में 10 चीते खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं तथा 5 चीतों को बाड़ों में रखा गया है। सभी चीतों की 24 घंटे मॉनीटरिंग की जा रही है। भारतीय वन्य जीवन संस्थान, देहरादून का एक शोध दल पूर्णकालिक रूप से परियोजना के क्रियान्वयन के लिए पालपुर में मौजूद है।