न्याय की गुहार जब हताशा में बदल जाए तो मंजर कितना खौफनाक हो सकता है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण आज जबलपुर हाई कोर्ट में देखने को मिला. मृत बच्चे के लिए न्याय की मांग कर रहा एक पिता सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए कोर्ट रूम में घुस गया और सीधे जज की डायस (मेज) पर अपने नवजात शिशु का भ्रूण रख दिया. इस घटना के बाद पूरे कोर्ट परिसर में हड़कंप मच गया. इस सनसनीखेज कदम के पीछे 200 करोड़ रुपये के घोटाले और जानलेवा हमले की घटना सामने आई है. घटना रीवा के निवासी दयाशंकर पांडे से जुड़ी है, जो पहले जबलपुर के शुभ मोटर्स में अकाउंटेंट थे.
2 सालों में उन पर चार बार हमले
दयाशंकर पांडे के आरोप के मुताबिक, उन्होंने वहां 200 करोड़ रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले का पता लगाया था. जब उन्होंने इस घोटाले के खिलाफ आवाज उठाई तो उन पर और उनके परिवार पर लगातार जानलेवा हमले शुरू हो गए.
पिछले 2 सालों में उन पर चार बार हमले हो चुके हैं. हाल ही में एक हमले के दौरान उनकी गर्भवती पत्नी के साथ मारपीट हुई, जिसके कारण उनका मिसकैरेज हो गया और अजन्मा बच्चा मर गया. दयाशंकर इस मृत भ्रूण को ही अपने दर्द और अन्याय का सबूत मानकर हाईकोर्ट लेकर पहुंचे.
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विरोध का यह रास्ता क्यों चुना?
घटना उस समय हुई जब कोर्ट में नियमित सुनवाई चल रही थी. पीड़ित का दावा है कि उसने स्थानीय पुलिस और प्रशासन से कई बार शिकायत की थी कि डिलीवरी के दौरान डॉक्टरों की चूक से उसके बच्चे की जान गई. वह लंबे समय से इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहा था, लेकिन जब उसे कहीं से राहत नहीं मिली, तो उसने विरोध का यह रास्ता चुना. उसने कोर्ट में गुहार लगाई कि या तो उन्हें और उनके परिवार को उचित सुरक्षा और न्याय मिले, या फिर इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए. उन्होंने बताया कि वे 2024 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने उनकी फरियाद पर कोई कार्रवाई नहीं की, इसीलिए उन्होंने जनहित याचिका दायर की थी.
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