मध्य प्रदेश में दतिया उपचुनाव 2026 के उम्मीदवार को लेकर छिड़ा विवाद अब हिंसकर विरोध प्रदर्शन में बदल गया है। BJP ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बना दिया। इससे नरोत्तम के समर्थक भड़क गए और उन्होंने बगावत कर दी। देररात BJP जिलाध्यक्ष समेत पूरी कार्यकारिणी ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। वहीं नरोत्तम के समर्थक विरोध प्रदर्शन करते हुए ग्वालियर-झांसी हाईवे को ब्लॉक कर दिया। हजारों प्रदर्शनकारियों ने बाजार और दुकानें बंद कराकर उपद्रव मचाने के साथ-साथ इलाके में माहौल खराब करने का प्रयास भी किया।

नरोत्तम के समर्थकों का पुलिस पर पथराव

दतिया के SP मयूर खंडेलवाल के अनुसार, नरोत्तम मिश्रा के सर्मथकों का विरोध प्रदर्शन अब हिंसक हो गया है। करीब 3000 प्रदर्शनकारी नेशनल हाईवे-44 को ब्लॉक करके बैठे हैं, जिससे ट्रैफिक बाधित हुआ है। आज सुबह 4 बजे के करीब टीम के साथ मौके पर गया। कलेक्टर पहले से वहां मौजूद थे, जिनके साथ मिलकर प्रदर्शनकारियों को समझाया और जाम खोलने की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी भड़क गए। उन्होंने पुलिस टीम पर पथराव किया, जिसमे वे घायल हो गए। एडिशनल SP समेत 6 से ज्यादा पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हाईवे पर लगा 15 किलोमीटर लंबा जाम

SP मयूर खंडेलवाल के अनुसार, हाईवे पर करीब 15 किलोमीटर लंबा जाम लगा है। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइनें लगी हैं। नरोत्तम के समर्थकों को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, लेकिन प्रदर्शनकारी पथराव करते रहे। पुलिस ने सख्ती बरतते हुए दोबारा आंसू गैस के गोले छोड़े और बल प्रयोग करके उपद्रवियों को खदेड़ दिया। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने हाईवे पर टायर जलाकर आगजनी करने का प्रयास भी किया, लेकिन पुलिस ने बल प्रयोग करके हाईवे को खुलवाया और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, सरेंडर करने की चेतावनी भी दी।

दतिया उपचुनाव का उम्मीदवार पूर्व संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी को बनाए जाने पर नरोत्तम के समर्थकों में असंतोष का जो ज्वालामुखी फटा है, उसकी आग दिल्ली तक पहुंची है। विरोधस्वरूप देररात भाजपा के जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह और पूरी कार्यकारिणी ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को इस्तीफे भेजे गए हैं, जिनमें पार्टी हाईकमान पर आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि अपमान का बदला लिया जाएगा। पूरी ताकत के देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। नरोत्तम मिश्रा को चुनाव उम्मीदवार न बनाकर पार्टी हाईकमान ने उपेक्षा की है।

रघुवीर सिंह कुशवाह ने इस्तीफे में लिखा कि उपेक्षा का शिकार हुए हैं। इसलिए मैं, जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, नगर पालिका दतिया अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, बड़ौनी पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, दतिया विधानसभा के 6 मंडलों के अध्यक्ष, मोर्चा अध्यक्ष, दतिया, बड़ौनी के समस्त पार्षदगण तथा दतिया विधानसभा की 281 बूथों के अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी समेत पदों से इस्तीफा देता हूं। अगर हाईकमान ने अगले पार्टी 24 घंटे में नरोत्तम मिश्रा को प्रत्याशी नहीं बनाया तो सभी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे देंगे। फिर पूरे देश में भाजपा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे।

दतिया में क्यों हो रहा उपचुनाव?

उपचुनाव की वजह कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता रद्द होना है। दरअसल, कोऑपरेटिव बैंक धोखाधड़ी से जुड़े एक बेहद पुराने आपराधिक मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली की एक अदालत ने राजेंद्र भारती को 3 साल की कैद की सजा सुना दी। सुप्रीम कोर्ट के कड़े नियमों के मुताबिक, सजा का ऐलान होते ही विधानसभा सचिवालय ने तुरंत राजेंद्र भारती की विधायकी रद्द कर दी, जिसके चलते दतिया में उपचुनाव की नौबत आई।

दतिया में क्यों हो रहे उपचुनाव?

दरअसल, 2023 के चुनाव में दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती विधायक चुने गए थे, उन्होंने नरोत्तम मिश्रा को करारी मात दी थी. लेकिन कोऑपरेटिव बैंक धोखाखड़ी से जुड़े एक पुराने क्रिमिनल केस की सुनवाई के दौरान दिल्ली की एक कोर्ट ने राजेंद्र भारती को दोषी ठहराते हुए 3 साल की सज़ा दे दी. जैसे ही वो आरोपी साबित हुए, उनकी विधायकी छीन ली गई. जिसके बाद दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव करवाने का फैसला लिया गया. सभी को उम्मीद थी कि नरोत्तम मिश्रा अब दतिया की कमान संभाल सकते हैं. दतिया सीट पर नरोत्तम मिश्रा का काफी बोलबाला रहा है. उन्होंने लगातार 3 बार इस सीट पर बीजेपी को जीत दिलाई थी. नरोत्तम मिश्रा एक बार दतिया में कमल खिलाने की तैयारी कर रहे थे. लेकिन पार्टी आलाकमान ने आशुतोष तिवारी को टिकट देकर उनके अरमानों पर पानी फेर दिया.

नरोत्तम मिश्रा का क्यों काटा टिकट?

नरोत्तम मिश्रा लगातार चुनाव प्रचार में जुटे थे और काफी एक्टिव थे. सभी को यही उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें ही चुनावी मैदान में उतारेगी, लेकिन हुआ कुछ और ही. माना जा रहा है कि बीजेपी ने ये फैसला सर्वे रिपोर्ट के आधार पर लिया है. दरअसल 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया सीट पर बीजेपी की करारी हार हुई थी. एक खास सेंट्रल सर्वे टीम लगातार लोगों के बीच मौजूद थी, जो ये पता लगा रही थी कि बीजेपी नेताओं को लेकर जनता की क्या राय है और वो उनके कामों से कितनी खुश या नाखुश है. कहा जा रहा है कि इस सीक्रेट सर्वे रिपोर्ट में नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी की बात ज़ाहिर हुई थी, जिसे लेकर बीजेपी हाईकमान अलर्ट मोड पर आ गया और ये बड़ा फैसला लिया. उधर, नरोत्तम मिश्रा लगातार जनता के बीच एक्टिव थे, समाज के बड़े लोगों से मेलजोल कर रहे थे. लेकिन बीजेपी के ऐलान के बाद उन्हें और उनके समर्थकों को काफी धक्का लगा है.