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‘गोवर्धन पूजा धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि पर्यावरण-संरक्षण का पर्व है’, कार्यक्रम में बोले CM मोहन यादव

CM Mohan Yadav Join 'Govardhan Puja': मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि गोवर्धन पूजा धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि पर्यावरण-संरक्षण का पर्व है।

CM Mohan Yadav Join 'Govardhan Puja': मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव शुक्रवार को उज्जैन में अनाज तिलहन व्यवसायी संघ एवं तिलकेश्वर गौशाला परिवार द्वारा आयोजित 'गोवर्धन पूजा' में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने गौ माता की पूजा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम मोहन यादव ने कहा कि गोवर्धन पूजा धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि पर्यावरण-संरक्षण का पर्व है। जिसमें कृषि और पशुधन के प्रति समाज की जिम्मेदारी को दिखाया जाता हैं। उन्होंने आगे कहा कि गोवर्धन पूजा के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के प्रति श्रद्धा और कृषि से जुड़ी परंपराओं को एकजुट होकर जीवित रखने की प्रेरणा मिलती है। इस लिए राज्य सरकार ने इस साल गौवर्धन पूजा को बड़े पैमाने पर पूरे राज्य में सरकार की सहभागिता के साथ मनाने का फैसला लिया है।

अर्थव्यवस्था के विकास में सहायक

सीएम मोहन यादव ने कहा कि गोवर्धन पूजा के जरिए हम प्रकृति और पशुधन के महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचा सकते हैं। इस पूजा का उद्देश्य न केवल धार्मिक बल्कि आर्थिक महत्व भी है, जिससे जन-जन को अवगत करना है। ये पूजा एक समर्थ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में सहायक है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को 'गौ-माता' का दर्जा दिया गया है। अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठानों और त्यौहारों में गाय का पूजा होती है, भारतीय समाज में इसकी गहरी धार्मिक मान्यताएं से जुड़ी हुई है। घर में गाय पालने की परंपरा लम्बे समय से रही है। यह भी पढ़ें: उज्जैन के नागरिकों को CM मोहन यादव ने खास अंदाज में दी दीवाली की बधाई; दिव्यांग दंपत्ति की मांग को किया पूरा

देवी लक्ष्मी का स्वरूप है गाय

सीएम मोहन यादव ने आगे कहा कि शास्त्रों में भी बताया गया है कि गाय उसी प्रकार पवित्र होती है जैसे नदियों में गंगा पवित्र है। इतना ही नहीं सीएम मोहन यादव ने गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी बताया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देवी लक्ष्मी सुख-समृद्धि देती हैं उसी प्रकार गौ-माता भी दूध से स्वास्थ्य के रूप धन प्रदान करती हैं। गौवंश सम्पूर्ण मानव जाति के लिए पूजनीय और आदरणीय है। यह गोवर्धन पूजा का पर्व भारतीय जनमानस को उनकी जड़ों से जोड़े रखता है। यह हमारी संस्कृति और परंपरा के संवर्धन का प्रतीक भी है। राज्य में 2500 गौ-शालाओं में 4 लाख से अधिक गायों का पालन होता है।


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