मध्य प्रदेश के सीहोर से एक वीडियो सामने आया है. जिसके बाद सोशल मीडिया पर नर्मदा नदी के आंचल में आस्ता और संसाधनों के उपयोग को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. वीडियो में देखा जा सकता है कि नर्मदा नदी में हजारों लीटर दूध बहाया जा रहा है. यह दृश्य जहां एक ओर श्रद्धालुओं के लिए अटूट श्रद्धा और एक भव्य अनुष्ठाक का हिस्सा है, तो वहीं दूसरी ओर इसने पर्यावरणविदों और समाज के प्रति जागरूक वर्ग को चिंता में डाल दिया है.
सीहोर के पातालेश्वर महादेव मंदिर में हुआ भव्य आयोजन
दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ यह वीडियो सीहोर जिले के सतदेव गांव का है. जहां श्री दादाजी दरबार पातालेश्वर महादेव मंदिर में चैत्र नवरात्रि के दौरान एक विशाल धार्मिक अनुष्ठान किया गया. यह आयोजन 18 मार्च से 7 अप्रैल तक पूरे 21 दिनों तक चला. इस दौरान महायज्ञ, शिव महापुराण कथा और दुर्गा पाठ जैसे कई कार्यक्रम हुए.
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वहीं, आयोजकों ने बताया कि इस भव्य आयोजन के लिए 5 एकड़ में विशाल पंडाल बनाया गया था और करीब 41 टन पूजन सामग्री, जड़ी बूटियों और सोने-चांदी तक का उपयोग किया गया. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह सप्तऋषियों की प्राचीन तपोभूमि है, जहां भगवान शिव प्रकट हुए थे, इसलिए यहां की महिमा भक्तों के लिए सर्वोपरि है.
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नदी में बहाया गया 11,000 लीटर दूध
हालांकि विवाद की मुख्य वजह वह अनुष्ठान बना जिसमें 11,000 लीटर दूध नर्मदा में अर्पित किया गया. श्री शिवानंद महाराज के भक्त पवन पवार ने बताया कि बाबा का नर्मदा जी के प्रति लगाव अनन्य है. वे खुद नंगे पैर परिक्रमा करते हैं और जनकल्याण के लिए काम करते हैं. उनके अनुसार, रोजाना 151 लीटर और एक विशेष दिन 1100 लीटर दूध से अभिषेक होता था, लेकिन बुधवार को यह आंकड़ा 11,000 लीटर तक पहुंच गया. भक्तों का मानना है कि नर्मदा उनके लिए मां हैं और यह उनकी निजी आस्था का विषय है, जिसे वे अपने संसाधनों से पूरा कर रहे हैं. उनके लिए यह एक दुर्लभ आध्यात्मिक संगम है जिसे तर्क की कसौटी पर नहीं कसा जाना चाहिए.
सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने एक ऐसे राज्य में इस तरह के काम के औचित्य पर सवाल उठाए जो कुपोषण की समस्या से जूझ रहा है. आलोचकों का तर्क था कि इतनी बड़ी मात्रा में दूध का इस्तेमाल कुपोषित बच्चों को खिलाने के लिए किया जा सकता था. कुछ लोगों ने पर्यावरण से जुड़ी चिंताएं भी उठाईं और चेतावनी दी कि नदी में दूध बहाने से बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) बढ़ सकती है, घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है और जलीय जीवों को नुकसान पहुंच सकता है.
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पानी में दूध के सड़ने से बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं, जिससे मछलियों और दूसरे जीवों के लिए वहां का इकोसिस्टम जहरीला हो सकता है.
मध्य प्रदेश की अपनी पोषण से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए यह विवाद और भी गहरा हो जाता है. हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) में, पोषण ट्रैकर और स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि राज्य में 10 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित हैं, जिनमें से 1.36 लाख से ज्यादा बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं. इसके अलावा, राज्य की 57 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित हैं.