आज के समय में लोग जमीन खरीदते वक्त सबसे पहले उसकी लोकेशन, कीमत और भविष्य में मिलने वाले फायदे को देखते हैं. लेकिन विशेषज्ञों कहते हैं कि कई बार जल्दबाजी में लोग एक बड़ी गलती कर बैठते हैं और जमीन से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड की जांच किए बिना ही सौदा कर लेते हैं. यही लापरवाही आगे चलकर कानूनी विवाद, फर्जी बिक्री, गलत रकबे या मालिकाना हक से जुड़े मामलों का कारण बन सकती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी प्लॉट, खेत या जमीन को खरीदने से पहले उसके आधिकारिक रिकॉर्ड को समझना उतना ही जरूरी है जितना उसकी कीमत और स्थान की जानकारी लेना. इस दौरान जमीन से जुड़े 2 सबसे महत्वपूर्ण कागजों को होना बेहद जरूरी है, बिना इसके जमीन खरीदने से बचना चाहिए. इस स्टोरी में हम आपको उन कागजों के बारे में तो बताएंगे ही, लेकिन साथ में अलग-अलग राज्यों की आधिकारिक वेबसाइटों के बारे में भी जानकारी देंगे, जहां आपको उस जमीन की जानकारी मिल सकेगी.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: वकीलों के लिए बड़ी खुशखबरी! हेल्थ इंश्योरेंस पर ये राज्य सरकार देगी ₹6000 का सालाना प्रीमियम

---विज्ञापन---

यह दोनों कागज है सबसे जरूरी

जमीन से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में खसरा और खतौनी का नाम जरूर से आता है. खसरा किसी जमीन या खेत की पहचान से जुड़ा रिकॉर्ड होता है, जिसमें जमीन का स्थान, उसका क्षेत्रफल और उससे संबंधित अन्य विवरण दर्ज रहते हैं. वहीं खतौनी उस जमीन के स्वामित्व की जानकारी देती है. इसमें यह दर्ज होता है कि किसी व्यक्ति के नाम कितनी जमीन है और उससे जुड़े खसरा नंबर कौन-कौन से हैं. आसान शब्दों में समझें तो खसरा जमीन की पहचान है, जबकि खतौनी उसके मालिक की जानकारी देने वाला दस्तावेज है. किसी भी जमीन की सही स्थिति जानने के लिए दोनों रिकॉर्ड देखना जरूरी माना जाता है.

---विज्ञापन---

गांव ही नहीं, शहरों में भी बढ़ गई इन रिकॉर्ड्स की अहमियत

पहले खसरा और खतौनी को मुख्य रूप से ग्रामीण और कृषि भूमि से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब शहरों में भी इनकी उपयोगिता तेजी से बढ़ रही है. सरकार द्वारा भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण पर जोर दिए जाने के बाद अधिकांश राज्यों में जमीन से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही है. ऐसे में शहरी क्षेत्रों में प्लॉट या प्रॉपर्टी खरीदने वाले लोगों के लिए भी इन रिकॉर्ड्स की जांच करना बेहद जरूरी हो गया है. इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि जमीन विवादित नहीं है और उसका स्वामित्व रिकॉर्ड सही है.

---विज्ञापन---

इन वेबसाइट पर मिलेगी जमीन की सारी जानकारी

आज अधिकांश राज्यों में भूलेख पोर्टल उपलब्ध हैं, जहां से आप आसानी से जमीन का रिकॉर्ड देख सकते हैं.

---विज्ञापन---

क्र.सं.राज्य का नामजमीन रिकॉर्ड (पोर्टल) का नामआधिकारिक वेबसाइट लिंक
1कर्नाटकभूमिपोर्टल पर जाएं ↗
2आंध्र प्रदेशमी-भूमिपोर्टल पर जाएं ↗
3बिहारबिहार भूमिपोर्टल पर जाएं ↗
4झारखंडझारभूमिपोर्टल पर जाएं ↗
5गुजरातAnyRORपोर्टल पर जाएं ↗
6पंजाबजमाबंदीपोर्टल पर जाएं ↗
7राजस्थानअपना खाता / E-धरतीपोर्टल पर जाएं ↗
8तमिलनाडुपत्ता चित्तापोर्टल पर जाएं ↗
9हरियाणाजमाबंदीपोर्टल पर जाएं ↗
10हिमाचल प्रदेशहिमभूमिपोर्टल पर जाएं ↗
11दिल्लीभूलेखपोर्टल पर जाएं ↗
12महाराष्ट्रभूलेख महाभूमिपोर्टल पर जाएं ↗
13पश्चिम बंगालबंगलारभूमिपोर्टल पर जाएं ↗
14केरलई-रेखापोर्टल पर जाएं ↗
15तेलंगानाधरणीपोर्टल पर जाएं ↗
16उत्तराखंडभूलेख / देवभूमिपोर्टल पर जाएं ↗
17उत्तर प्रदेशभूलेखपोर्टल पर जाएं ↗
18मध्य प्रदेशभूलेखपोर्टल पर जाएं ↗
19ओडिशाभूलेखपोर्टल पर जाएं ↗
20छत्तीसगढ़भुइयांपोर्टल पर जाएं ↗
21असमधारित्रीपोर्टल पर जाएं ↗
22गोवागोवा लैंड रिकॉर्डपोर्टल पर जाएं ↗
23मणिपुरलोचापथापपोर्टल पर जाएं ↗

ऑनलाइन घर बैठे ऐसे चेक करें जमीन का रिकॉर्ड

  • स्टेप 1: अपने राज्य की आधिकारिक भूलेख (Land Records) वेबसाइट खोलें.
  • स्टेप 2: जिला (District), तहसील (Tehsil) और गांव (Village) का चयन करें.
  • स्टेप 3: खसरा नंबर, खाता नंबर या जमीन मालिक का नाम दर्ज करें.
  • स्टेप 4: जानकारी सबमिट करते ही जमीन का रिकॉर्ड स्क्रीन पर दिखाई देने लगेगा.
  • स्टेप 5: रिकॉर्ड में जमीन का क्षेत्रफल, मालिक का नाम, खसरा-खतौनी और अन्य जरूरी विवरण जांच लें.
  • स्टेप 6: अगर ऑनलाइन रिकॉर्ड उपलब्ध न हो, तो संबंधित तहसील या राजस्व विभाग कार्यालय से जानकारी प्राप्त की जा सकती है.
  • ध्यान रखें: जमीन खरीदने से पहले खसरा और खतौनी की जांच जरूर करें. इससे फर्जी बिक्री, मालिकाना विवाद और भविष्य में होने वाले आर्थिक या कानूनी नुकसान से बचा जा सकता है.

यह भी पढ़ें: दिल्ली में अब काम के बहाने नहीं कटेगी बिजली-पानी; PWD के नए प्लान से हमेशा के लिए खत्म