हिमाचल प्रदेश के सोलन के जौणाजी में शुक्रवार को आयोजित सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति ने बिजली के भारी-भरकम बिल का मामला उठाकर सरकार से न्याय की गुहार लगाई. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल कर रहे थे. फरियादी ने बताया कि पहले उसका बिजली बिल करीब 300 रुपये आता था लेकिन अचानक 20 हजार रुपये का बिल भेज दीया गया. बिल का भुगतान न कर पाने के कारण उसकी बिजली काट दी गई. उसने कहा कि बिजली बोर्ड में कई बार शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

पीड़ित ने भावुक होते हुए कहा कि मंत्री जी, मैं दीया जलाकर रह लूंगा, लेकिन 20 हजार रुपये का बिल नहीं दूंगा. मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं. अगर बिजली नहीं देनी तो बोर्ड अपना पोल और मीटर ले जाए. हम 50 साल पीछे पुराने इतिहास में जाएंगे हमने नए में नहीं जाना.

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मंत्री शांडिल ने फरियादी की बात सुनकर तत्काल अधिकारियों को निर्देश दिए कि मामले की जांच की जाए और अगर गलती हुई है तो बिल सुधार किया जाए. उन्होंने आश्वासन दीया कि सरकार गरीबों की समस्याओं को प्राथमिकता दे रही है और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों का समाधान किया जाएगा. गौरतलब है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पुराने मीटरों को वापस लगाने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि नई तकनीक उनके लिए बोझ बन रही है. सरकार ने दावा किया है कि स्मार्ट मीटर पारदर्शिता बढ़ाएंगे और चोरी रोकेंगे, लेकिन जमीन पर इसके क्रियान्वयन में खामियां साफ नजर आ रही हैं.

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