हिमाचल प्रदेश आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है और राज्य सरकार ने इस स्थिति में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में विधानसभा में ‘हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया गया और विपक्ष के विरोध के बावजूद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. अब यह बिल राज्यपाल की मंजूरी के बाद कानून बन जाएगा, जिसके लागू होते ही पेट्रोल और डीजल के दाम 5 रुपए तक बढ़ जाएंगे.

सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर लगाया गया नया ‘अनाथ-विधवा सेस’ यह सुनिश्चित करने के लिए लगाया है कि अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए नियमित आय सुनिश्चित हो. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि यह सेस सीधे उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा और हिमाचल में ईंधन के दाम पड़ोसी राज्यों की तुलना में अभी भी बेहतर हैं.

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हालांकि इस कदम पर विपक्ष ने तीखा विरोध जताया. नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कहा कि सरकार आर्थिक संकट के बहाने आम जनता पर बोझ डाल रही है. उनका कहना था कि वेतन में 50 से 20 प्रतिशत तक की कटौती और पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतें आम लोगों के लिए कठिनाई पैदा कर रही हैं.

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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि डीजल पर टैक्स 10.40 रुपए से बढ़ाकर 15.40 रुपए प्रति लीटर किया गया है. इसका असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि महंगे ईंधन से परिवहन, कृषि, सिंचाई, बागवानी और पर्यटन उद्योग पर नकारात्मक असर होगा. पिछले 40 महीनों में सरकार ने चार हज़ार करोड़ टैक्स के रूप में वसूले हैं और अब नए सेस से लगभग 2 हज़ार करोड़ और जुटाने की तैयारी है.

सरकार का तर्क है कि इस अतिरिक्त टैक्स से जुटाया गया पैसा अनाथ और विधवाओं की भलाई में खर्च किया जाएगा, जबकि विपक्ष इसे जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला कदम बता रहा है. अब यह बिल राज्यपाल की मंजूरी के बाद प्रभावी होगा और हिमाचल प्रदेश में ईंधन के नए दाम लागू किए जाएंगे.