राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने शताब्दी वर्ष में संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया है. हरियाणा के समालखा में हुई संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में संगठन विस्तार, सामाजिक कार्यक्रमों और संरचनात्मक बदलावों पर व्यापक चर्चा हुई. बैठक के बाद संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और अंतरराष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने प्रेस वार्ता कर कई मुद्दों पर संघ का पक्ष रखा.

तीन दिनों तक चली इस बैठक में देशभर के 46 प्रांतों से कुल 1487 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. चार साल बाद समालखा में आयोजित इस प्रतिनिधि सभा में संघ के विस्तार और आने वाले वर्षों की रणनीति पर चर्चा हुई. संघ के मुताबिक देशभर में 55 हजार से अधिक स्थानों पर 88 हजार से ज्यादा शाखाएं चल रही हैं, जिनमें नगरीय क्षेत्रों में ही 10 से 12 हजार शाखाएं सक्रिय हैं.

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संघ का कहना है कि संगठन का विस्तार अब अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और जनजातीय इलाकों तक पहुंच चुका है. बैठक में “पंच परिवर्तन” के एजेंडे के तहत समाज परिवर्तन, भारतीय संस्कृति के नैरेटिव को मजबूत करने और समाज में सज्जन शक्तियों के सहयोग जैसे मुद्दों पर भी विचार हुआ.

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ईरान पर संघ का रुख

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत को लेकर उठे विवाद पर संघ ने संतुलित प्रतिक्रिया दी. सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि संघ विश्व शांति का पक्षधर है और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर टिप्पणी करना उसका विषय नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार जो निर्णय ले रही है, वह उचित है.
श्रद्धांजलि संदेशों को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा रही है कि जीवित रहते किसी से मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मृत्यु के बाद उसका विरोध नहीं किया जाता.

यूजीसी विवाद पर सावधानी

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से जुड़े विवाद पर भी संघ ने फिलहाल कोई स्पष्ट पक्ष नहीं लिया है. होसबोले ने कहा कि यह मामला फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है. ऐसे में अदालत का फैसला आने के बाद ही संघ इस विषय पर अपनी राय स्पष्ट करेगा.

प्रांत प्रचारक व्यवस्था में बड़ा बदलाव

प्रतिनिधि सभा की बैठक में संघ के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव भी सामने आया. अभी तक संघ के ढांचे में बड़े राज्यों को कई प्रांतों में बांटकर वहां प्रांत प्रचारक नियुक्त किए जाते थे और देशभर में करीब 45 प्रांत प्रचारक सक्रिय हैं.

नई व्यवस्था के तहत प्रांत प्रचारकों की जगह राज्य प्रचारक नियुक्त करने की योजना है. यानी जहां पहले एक राज्य में कई प्रांत प्रचारक होते थे, वहां अब एक ही राज्य प्रचारक पूरे राज्य की जिम्मेदारी संभालेगा.

इसके साथ ही शीर्ष स्तर पर क्षेत्रों की संख्या 11 से घटाकर 9 करने की तैयारी है, जबकि नीचे के स्तर पर संभाग को नई संगठनात्मक इकाई के रूप में मजबूत किया जाएगा. प्रस्ताव के अनुसार दो प्रशासनिक मंडलों को मिलाकर एक संभाग बनाया जाएगा और वहां संभाग प्रचारक तैनात होंगे. देशभर में ऐसे करीब 80 संभाग बनने की संभावना है. इससे जिला और प्रखंड स्तर के कार्यकर्ताओं का संवाद सीधे संभाग प्रचारकों से होगा और फैसलों की प्रक्रिया में तेजी आएगी.

संघ सूत्रों के मुताबिक संगठनात्मक बदलाव के इस प्रस्ताव को फिलहाल सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है. सितंबर 2026 की बैठक में इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है और जनवरी–फरवरी 2027 तक पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है.

कुल मिलाकर, अपने शताब्दी वर्ष के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संगठन को नए ढांचे, ज्यादा विकेंद्रीकरण और जमीनी स्तर पर मजबूत संवाद के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी में है.