हरियाणा सरकार ने प्रदेश की कामकाजी महिलाओं के लिए एक पॉलिसी बनाने का फैसला किया है। पॉलिसी के अनुसार, अब प्रदेश में प्रेग्नेंट महिलाओं के पतियों का HIV और सिफलिस टेस्ट किया जाएगा। प्रदेश में HIV एड्स और अन्य बीमारियों को फैलने से रोकने के मकसद से यह फैसला किया गया है। अभी पॉलिसी बनाने पर सहमति बनी है। प्रदेश सरकार ने संबंधित विभाग और अधिकारियों को पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार करके पेश करने को कहा है।
पॉलिसी पर वर्किंग कमेटी में फैसला लिया गया
बता दें कि चंडीगढ़ में हरियाणा राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी (HSACS) की 23वीं वर्किंग कमेटी की बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) डॉ. सुमिता मिश्रा ने की थी। इस मीटिंग में हरियाणा की महिला वर्किंग स्टाफ के लिए HIV एड्स कार्यस्थल नीति लागू करने का फैसला किया गया, जिसके तहत प्रेग्नेंट महिलाओं के साथ-साथ उनके पतियों के HIV और सिफलिस टेस्ट किए जाएंगे।
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सरकार ने पॉलिसी बनाने का फैसला क्यों किया?
हरियाणा सरकार के अनुसार, पॉलिसी लागू होने के बाद HIV और सिफलिस जैसी बीमारियों को मां से बच्चे में फैलने से रोका जा सकेगा और गर्भ में पल रहे बच्चे को भी इन दोनों बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सकेगा। पॉलिसी लागू होने के बाद इस साल ही करीब 6 लाख टेस्ट करने की योजना है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) ने इस साल हरियाणा में 595880 HIV और सिफलिस टेस्ट करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं हर साल करीब 12 लाख टेस्ट किए जाने की योजना है।
पंचकूला में नई लैब बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी
पॉलिसी के तहत संक्रमित व्यक्तियों (PLHIV) के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने की मंजूरी भी दी गई है, जिसके तहत पीड़ितों को वॉइस मैसेज और अलर्ट भेजकर मॉनिटर किया जाएगा। ट्रीटमेंट के लिए फॉलो-अप रिमाइंडर भी भेजे जाएंगे। सरकार ने पॉलिसी बनाने के लिए साल 2026-27 के लिए 47.16 करोड़ रुपये का बजट भी रखा है। पंचकूला में एक और HIV वायरल लोड लैब बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। एक लैब PGIMS रोहतक में चल रही है, जो 17 जिलों में सेवा देती है।
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HIV संक्रमण और सिफलिस टेस्ट क्या है?
HIV इम्यून सिस्टम पर हमला करने वाला एक वायरस है, जो व्हाइट ब्लड सेल्स पर अटैक करता है। इसके हमले से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। टीबी, सीवियर इन्फेक्शन और कैंसर जैसी बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है। अगर सही समय पर इलाज न मिले तो एक्वायर्ड इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम (AIDS) हो सकता है। वहीं सिफलिस एक गंभीर यौन संचारित संक्रमण (STI) है, जो ट्रेपोनेमा पैलिडम नामक बैक्टीरिया से फैलता है। असुरक्षित यौन संबंध बनाते समय संक्रमित व्यक्ति के घावों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।
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