गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे पुलिस मुख्यालय परिसर में उस समय अचानक हड़कंप मच गया जब एक युवती, जो कि दुष्कर्म की पीड़िता है वो पेट्रोल की बोतल और माचिस लेकर कमिश्नर ऑफिस के गेट पर पहुंची. रो-रोकर चीखती हुई उसने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क लिया और आग लगाने की कोशिश की. लड़की ने कहा, “अब तो मौत ही एकमात्र रास्ता है… न्याय नहीं मिलेगा तो जीने का क्या फायदा?”
पीड़िता ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि तीन महीने पहले हुए रेप के मामले में कोर्ट का स्पष्ट आदेश होने के बावजूद आरोपी अभी तक फरार है. उल्टा आरोपी के परिवार वाले और उनके गुंडे उसे और उसके परिवार को खुलेआम धमकियां दे रहे हैं.
युवती का आरोप है कि बदमाशों ने उसे जबरन खाली कागजों पर दस्तखत और अंगूठे लगवाए तथा समझौते के लिए जबरदस्ती दबाव डाला जा रहा है. “वे कहते हैं कि केस वापस ले लो, वरना जान से मार देंगे. मैं थक गई हूं… अब बस मौत ही चाहती हूं.” पीड़िता ने यह आत्मघाती कदम उठाने से पहले वीडियो जारी की और ईमेल करके पुलिस अधिकारियों को पहले ही सूचना दे दी थी।.
पुलिस की लापरवाही ने किया मजबूर
सौभाग्य से ड्यूटी पर तैनात जवान हरकत में आए और युवती के हाथ से पेट्रोल की बोतल व माचिस छीन ली. जिससे एक बड़ा हादसा टल गया, लेकिन दिल दहला देने वाला ये दृश्य पूरे गुरुग्राम में खलबली मचा रहा है.
सवाल अब ये उठ रहा है कि आखिर पुलिस कमिश्नर ऑफिस में युवती आत्मदाह के लिए पहुंची. आखिर इतनी हिम्मत किसकी हुई कि पीड़िता को इतना मजबूर किया गया? क्या आरोपी इतना ताकतवर है कि पुलिस भी उसे छू नहीं पा रही?
महिला थाना सेक्टर 51 में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद तीन महीने से ठंडे बस्ते में क्यों रखा गया? पीड़िता का रोना देखकर आसपास खड़े लोग भी भावुक हो गए. एक स्थानीय महिला ने कहा, “ये न्याय है या मजाक? लड़की को रेप का शिकार बनाया, फिर धमकाया और अब पुलिस भी चुप है.
पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल
इस घटना ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रेप जैसे जघन्य अपराध में आरोपी को संरक्षण मिलना और पीड़िता का इस कदर आत्महत्या के कगार पर पहुंचना गुरुग्राम पुलिस की छवि पर सवालिया निशान लगाता है. सोशल मीडिया पर इस घटना की खबर फैलते ही लोग भड़क उठे हैं. विपक्षी दलों ने भी सरकार पर हमला बोल दिया है.
पुलिस का बयान
पुलिस ने बताया कि युवती को तुरंत काउंसलिंग के लिए भेजा गया है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है. लेकिन पीड़िता का कहना है कि अब बहुत देर हो चुकी है. क्या इस बार पीड़िता की चीख सुनी जाएगी या फिर फाइलों में दबकर रह जाएगी? गुरुग्राम की इस सनसनीखेज घटना ने पूरे हरियाणा को झकझोर दिया है. न्याय की मांग अब सिर्फ कोर्ट तक नहीं, सड़कों पर भी गूंज रही है.
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