गुरुग्राम में पालम विहार इलाके की न्यू निहाल कॉलोनी में स्थित 'गैलेक्सी वन हॉस्पिटल' में पुलिस ने बड़े पैमाने पर चल रहे मेडिकल इंश्योरेंस फ्रॉड का भंडाफोड़ किया है. पिछले महीने पुलिस ने जब इस तीन मंजिला जर्जर इमारत में चल रहे गैलेक्सी वन हॉस्पिटल में छापेमारी की थी तो पाया कि करीब 500 से ज्यादा ऐसे लोग थे जो असल में बीमार नहीं थे, लेकिन उन्होंने पैसों के लालच में अपना आधार कार्ड और निजी विवरण गिरोह को दे रखे थे. उन्हें 'मरीज' दिखाकर फर्जी अस्पताल में भर्ती दिखाया जाता था. यहां से करीब 60 फर्जी इंश्योरेंस क्लेम फाइल्स बरामद हुईं जो लगभग 25 इंश्योरेंस कंपनियों से जुड़ी थीं.

जांच में सामने आया कि एएस यादव नाम का शख्स अपने दो बेटों और कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर यह खेल खेल रहा था. पुलिस ने 25 फरवरी को यादव, उसके बेटों और तीन कर्मचारी सपना, वर्षा और गौरव को गिरफ्तार किया गया. ये फर्जी क्लेम तैयार करने और फैसिलिटेट करने में शामिल थे.

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ऐसे चलता था 'फर्जीवाड़ा'

केवल इंश्योरेंस कंपनियों को ठगने के लिए किराये की इमारतों में फर्जी अस्पताल बनाए गए, जो सिर्फ कागजों पर मेडिकल संस्थान दिखते थे. लोगों को फर्जी मरीज बनाकर उनकी आधार और अन्य डिटेल्स ली जाती थीं. अस्पताल स्टाफ फर्जी एडमिशन रिकॉर्ड, लैब रिपोर्ट्स, फार्मेसी बिल, ट्रीटमेंट बिल और डायग्नोस्टिक रिपोर्ट्स तैयार करता था. फर्जी मरीजों को क्लेम फाइल करवाए जाते थे, और पैसे आने पर सब मिलकर बांट लेते थे. क्लेम अमाउंट फर्जी मरीज के अकाउंट में आता, फिर वे कट लेकर बाकी पैसे आरोपी को देते. इस खेल में इंश्योरेंस कंपनियों के 'प्राइवेट इन्वेस्टिगेटर्स' की भूमिका भी संदिग्ध है. ये लोग कागजों की जांच करते समय जानबूझकर आंखें मूंद लेते थे और फर्जी क्लेम को हरी झंडी दे देते थे.

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करोड़ों का ट्रांजेक्शन और 'नकली' डिग्री

एसीपी (वेस्ट) अभिलाक्ष जोशी ने बताया कि अब तक 1 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जीवाड़े के सबूत मिल चुके हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि यादव के पास कोई वैध मेडिकल डिग्री नहीं थी. गैलेक्सी वन हॉस्पिटल पर नीले साइनबोर्ड और पोस्टर्स लगे थे, लेकिन असल में यह सिर्फ कागजी अस्पताल था. आरोपी यादव केवल गुरुग्राम ही नहीं बल्कि द्वारका और फारुखनगर जैसे इलाकों में भी इसी तरह के फर्जी अस्पताल चला चुका है. ये सभी 2018 से दो साल के लिए सिर्फ फ्रॉड के लिए सेटअप किए गए थे. पुलिस को शक है कि इसमें 500 से ज्यादा फर्जी मरीज शामिल हैं, जो अभी फरार हैं. स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम उन्हें ट्रेस कर रही है.