खंभात के वत्रा-वटादरा सीमा क्षेत्र में जहरीली गैस से हड़कंप मच गया. हजारों पक्षियों की मौत हो गई और 500 से अधिक बीघा जमीन में धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है. खंभात तालुका के वत्रा और वटादरा गांव की सीमा में रासायनिक कंपनियों द्वारा जहरीली गैस छोड़े जाने से अफरा-तफरी मच गई. ग्रामीणों ने कलमसर स्थित रोहन डाइज और जय केमिकल कंपनी पर सीधे आरोप लगाया कि इन फैक्ट्रियों द्वारा नियमों का उल्लंघन करते हुए अंधेरे में जहरीली गैस छोड़ी गई.

इस भयावह घटना के कारण पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. इस दौरान स्थानीय किसानों और पर्यावरण को भी काफी नुकसान हुआ है. मिली जानकारी के अनुसार, लगभग 500 बीघा से अधिक जमीन में बोई गई धान की फसल जलकर राख हो गई, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. गैस इतनी घातक थी कि आसमान में उड़ रहे और आस-पास के पेड़ों पर बैठे हजारों पक्षी कुछ ही क्षणों में नीच गिरकर मर गए. पक्षियों की सामूहिक मौत से पक्षीप्रेमियों में भी चिंता और भय का माहौल है.

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जहरीली गैस के वातावरण में फैलने के बाद वत्रा और वटादरा के ग्रामीणों को सांस लेने में परेशानी आंखों में जलन, उल्टी और जी मिचलाने जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ा है.

गांव के लोगों का आरोप है कि इन कंपनियों द्वारा बार-बार इसी तरह जहरीली गैस छोड़ी जाती है, जिससे पूरे क्षेत्र के लोग बुरी तरह परेशान हो चुके हैं. स्थानीय नेताओं और गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) सहित प्रशासनिक तंत्र के समक्ष शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है. प्रशासन की इस निष्क्रियता को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है. ग्रामीणों ने जिम्मेदार कंपनियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है.

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FSL की टीम कर रही मामले की जांच

घटना के दौरान पेड़ों पर बैठे पक्षी अचानक जमीन पर गिरने लगे थे. इस खौफनाक मंजर को देखकर ग्रामीणों ने तुरंत प्रांत अधिकारी और तहसीलदार को शिकायत की और आरोपी कंपनियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की. खंभात रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO) देसाई ने बताया कि मृत पक्षियों के शवों को वन विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया है और उन्हें तत्काल पशु चिकित्सालय भेजा गया है. पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रुचिक आंजणा की विशेष डॉक्टरों की पैनल ने मृत पक्षियों का पोस्टमार्टम किया है और मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए विसरा सैंपल FSL (फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी) भेज दिए हैं.

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