Morbi Bridge Tragedy: मोरबी पुल हादसा मामले में कोर्ट ने 4 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा
Edited By Om Pratap

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Morbi Bridge Tragedy: गुजरात के मोरबी में एक मजिस्ट्रेट अदालत ने शनिवार को पुलिस रिमांड देने से इनकार कर दिया और चार आरोपियों को न्यायिक हिरासत का आदेश दिया, जिन्हें ओरेवा समूह द्वारा काम पर रखा गया था। इन चार आरोपियों में ओरेवा समूह के दो प्रबंधक और सुरेंद्रनगर स्थित ठेकेदारों के दो कर्मचारी शामिल हैं।
इन चारों आरोपियों को मच्छू नदी पर हैंगिंग ब्रिज टूटने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। बता दें कि मोरबी हैंगिंग ब्रिज 30 अक्टूबर को टूटकर मच्छू नदी में गिर गया था जिसमें 135 लोगों की जान चली गई थी। अदालत ने 1 नवंबर को आरोपी को पांच दिन की रिमांड दी थी, जो शनिवार को समाप्त हो गई।
अभियोजन पक्ष ने पांच दिन की और रिमांड की मांग की थी और कहा था कि पुलिस को राजकोट कलेक्टर कार्यालय से 2008 में ओरेवा-अजंता समूह और मोरबी नगरपालिका के बीच एक समझौते के संबंध में कुछ दस्तावेज प्राप्त नहीं हुए हैं। समझौता निजी फर्म को सस्पेंशन ब्रिज के संचालन और प्रबंधन को सौंपने के लिए था।
करीब सात महीने पहले पुल को परिचालन के लिए बंद कर दिया गया था। निजी कंपनी ओरेवा ग्रुप को इस साल मार्च में पुल के रखरखाव, संचालन और अगले 15 साल की सुरक्षा का ठेका दिया गया था। कंपनी ने 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान मच्छू नदी पर बने पुल के मरम्मत के लिए धंगधरा स्थित ठेकेदार देवप्रकाश सॉल्यूशन को उप-अनुबंध दिया था।
ओरेवा के प्रबंध निदेशक जयसुख पटेल ने 26 अक्टूबर को गुजराती नव वर्ष के अवसर पर अपने परिवार के सदस्यों के साथ पुल का उद्घाटन किया था और नवीनीकरण के बाद जनता के लिए इसे फिर से खोल दिया गया था। पटेल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की जिसमें दावा किया गया कि पुल आगंतुकों के लिए तैयार है। चार दिन बाद ही पुल टूटकर गिर गया और 135 लोगों की जान चली गई।
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