मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध के बादलों ने अब गुजरात की अर्थव्यवस्था और उद्योगों पर सीधा प्रहार करना शुरू कर दिया है. कच्चे तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होने के कारण, गुजरात गैस लिमिटेड (GGL) ने राज्य के उद्योगों के लिए गैस आपूर्ति में 50% तक की कटौती करने का कड़ा फैसला लिया है.
कतर ने घोषित किया ‘फोर्स मेज्योर’, भारत में गहराया संकट
भारत को अपनी जरूरत का लगभग 40% प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यात करने वाले देश कतर ने गैस आपूर्ति को लेकर ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) यानी अनिवार्य परिस्थिति घोषित कर दी है. ईरान के ड्रोन हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण उत्पादन और परिवहन ठप हो गया है. इसी का नतीजा है कि भारत की दिग्गज गैस कंपनी ‘पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड’ ने वितरण कंपनियों को सप्लाई कम होने की चेतावनी दी है.
मोरबी सिराममिक क्लस्टर पर सबसे बड़ी मार
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े सिराममिक क्लस्टर मोरबी पर इस अंतरराष्ट्रीय संकट का सबसे बुरा असर पड़ा है. गुजरात गैस ने गैस बिक्री समझौते के तहत नियमों को सख्त करते हुए निम्नलिखित घोषणाएं की हैं:
50% की कटौती:
6 मार्च 2026 से 31 मार्च 2026 तक सभी सिराममिक इकाइयों को मिलने वाली गैस में 50% की कटौती रहेगी. यह कोटा फरवरी 2026 के औसत दैनिक उपयोग के आधार पर तय होगा. जिन ग्राहकों के पास मिनिमम गारंटीड ऑफटेक (Non-MGO) अनुबंध नहीं है, उनका दैनिक कोटा 6 मार्च से शून्य (Zero) कर दिया गया है.
सख्त कार्रवाई की चेतावनी:
यदि कोई इकाई निर्धारित सीमा से अधिक गैस का उपयोग करती पाई गई, तो बिना किसी पूर्व सूचना के उसका कनेक्शन तुरंत काट दिया जाएगा.
आम जनता पर क्या होगा असर?
राहत की बात यह है कि गैस कंपनियों ने फिलहाल अपनी प्राथमिकताएं तय कर ली हैं ताकि आम जनजीवन प्रभावित न हो:
घरेलू गैस (Domestic PNG): घरों में रसोई गैस की सप्लाई को अनिवार्य सेवा मानते हुए इसे कटौती से बाहर रखा गया है. फिलहाल घरों में गैस की कमी नहीं होगी.
वाहन (CNG),औद्योगिक क्षेत्र
परिवहन व्यवस्था सुचारू रखने के लिए सीएनजी पंपों पर भी कोई बड़ी कटौती नहीं की गई है. इस संकट की पूरी मार केवल औद्योगिक इकाइयों पर पड़ी है, जिससे उत्पादन घटने और बेरोजगारी बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है.
क्यों पैदा हुए ये हालात?
ईरान द्वारा खाड़ी देशों और समुद्री मार्गों पर किए जा रहे हमलों के कारण होर्मुज जलमार्ग के माध्यम से तेल और एलएनजी का परिवहन रुक गया है. इससे न केवल गैस की कमी हुई है, बल्कि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों, बीमा लागत और शिपिंग खर्च में भारी उछाल आया है. भारत, जो दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी खरीदार है, अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कतर और पश्चिम एशिया पर निर्भर है.
यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में गैस की कीमतें भी बढ़ सकती हैं.
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