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क्या है गुजरात पुलिस का अभिरक्षक? रोड एक्सीडेंट में बनेगा मददगार, ऐसे बचाएगा जान

गुजरात पुलिस ने रोड एक्सीडेंट में घायलों की मदद के लिए एक स्पेशल गाड़ी मिलगी, जिसका नाम अभिरक्षक है। यह गाड़ी हादसे के बाद फंसे लोगों के साथ-साथ गंभीर रूप से घायल की मदद करेगा। चलिए इसके बारे में पूरी जानकारी जान लेते हैं।

गुजरात पुलिस इन दिनों काफी एक्टिव मोड में काम कर रही है। इसी में पुलिस ने सराहनीय पहल शुरू की है। जिसमें सड़क हादसे में घायलों को अब इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। दरअसल, गुजरात पुलिस ने 'अभिरक्षक' गाड़ी खरीदी हैं। यह गाड़ी ‘एक्सीडेंट रिस्पॉन्स एंड रेस्क्यू व्हीकल’ पायलट प्रोजेक्ट के तहत काम करेगी। इसे अहमदाबाद और सूरत में तैनाती की जाएगी। आजकल सड़क हादसों की भरभार है, इसके लिए पुलिस ने यह कदम उठाया है। इसमें अगर कोई गायल है और कापी गंभीर रूप से घायल है तो उसे तुरंत उपचार दिया जाएगा। गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने इस पहल को लेकर बताया कि राज्य के लोगों की सुरक्षा को देखते हुए ही यह फैसला लिया है। इसी टेक्निक को आगे भी बढ़ाया जाएगा।

क्या है 'अभिरक्षक'?

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'अभिरक्षक' गाड़ी स्पेशली उन जगहों के लिए है, जहां सड़क दुर्घटना ज्यादा होती हैं और अक्सर समय पर सहायता नहीं मिल पाती है। इसके लिए ही इसकी मदद ली जाएगी। किसी भी हादसे के बाद ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान घायल का बचाव करने के लिए उसे पास के अस्पताल में पहुंचाया जाएगा। ये गाड़ी आम लोगों के लिए जरूरी भूमिका निभाएगी। यह गाड़ियां इस वक्त काम आएंगी, जब एक्सीडेंट में घायल कहीं फंसा हुआ है और उसे कोई मदद नहीं मिल पा रही है।

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क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं?

इस गाड़ी में ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ 32 से ज्यादा स्पेशल रेस्क्यू टूल्स और इक्विपमेंट्स रहेंगे। इसमें मेटल कटर, ग्लास कटर, बोल्ट कटर, टेलीस्कोपिक लैडर, स्ट्रेचर, जनरेटर और हैवी वेट उठाने वाली विंच जैसी जरूरी मशीनें शामिल हैं। इसके साथ ही रात के समय भी आराम से रेस्क्यू हो पाए, इसके लिए पावरफुल लाइटिंग सिस्टम और जनरेटर भी अवेलेबल हैं। इसके अलावा नाइट विजन गॉगल्स, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम, ट्रैफिक कंट्रोल लाइट ब्लिंकर्स और ड्रोन ऑपरेशन के लिए अलग से चैंबर जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी।

इस गाड़ी की बॉडी और अंदर-बाहर का डिजाइन फायरप्रूफ और अटैक-रेजिस्टेंट है। इससे भीड़भाड़ जैसी कंडीशन में भी सेफली तरीके से काम कर सकेगी। ‘अभिरक्षक’ एक ऐसी पहल है, जो सड़क हादसों में घायल को एक तरह से फर्स्ट एड देने जैसा काम करेगी। इससे समय पर किसी की जान बच पाएगी। अगर ये प्रोजेक्ट सफल हो जाता है तो राज्य के अन्य जिलों में भी इसे लाया जाएगा।

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