Gujarat Government Big Decision: अब गुजरात सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में सख्त कदम उठाने जा रही है। सरकार ने इस दिशा में एक और अहम कदम उठाया है। आपको बता दें, पीएमजेएवाई योजना में घोटाले के बाद राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए एक और फैसला लिया है। अब से राज्य के निजी अस्पतालों के लिए अपने मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदना अनिवार्य नहीं है। यह पत्र राज्य के फूड और ड्रग्स डिपार्टमेंट द्वारा जारी किया गया था।
कुछ निजी अस्पताल मरीजों को अपने मेडिकल स्टोर से या अस्पताल के नजदीक के मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। एक अस्पताल की दवा एक निश्चित मेडिकल के अलावा कहीं और उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गुजरात सरकार ने नियम बनाया है कि मरीज कहीं से भी छूट पर दवा खरीद सकते हैं।
राज्य के फूड और ड्रग्स डिपार्टमेंट द्वारा जारी एक सर्कुलर में कहा गया है कि निजी अस्पतालों के लिए अपने खुद के मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदना अनिवार्य नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि इन-हाउस मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इस संबंध में मेडिकल स्टोर के बाहर एक बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाया जाए कि इस अस्पताल के मरीजों को यहां से दवा खरीदना अनिवार्य नहीं है।
इस सिस्टम के तहत सभी सहायक आयुक्तों को सूचित किया गया है कि अस्पताल के मरीजों को राज्य के अस्पतालों में इन-हाउस मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। इसलिए हर एक इन-हाउस मेडिकल स्टोर के मैनेजर को अनिवार्य रूप से मरीजों के दवा खरीदने आने पर साफ तौर से दिखाई देने वाली एक खास सूचना लगानी होगी। “इस अस्पताल के मरीजों को यहां से दवा खरीदने की जरूरत नहीं है” का बोर्ड लगाना अनिवार्य है।
गौरतलब है कि सरकार अब यह तय करने की दिशा में काम कर रही है कि आने वाले दिनों में किन परिचालनों पर चार्ज लगाया जाएगा। जिससे किसी भी ऑपरेशन पर उसके निर्धारित मूल्य पर ही चार्ज लिया जाएगा। भविष्य में सरकार इस दिशा में कदम उठाएगी।
PMJAY योजना
पिछले हफ्ते, राज्य में योजना के तहत लिस्टेड कुल 5 अस्पतालों और 2 डॉक्टरों को सस्पेंड कर दिया गया था। पाटन-2, दाहोद-1, अहमदाबाद और अरावली के एक अस्पताल को सस्पेंड कर दिया गया। प्री-ऑथ के दौरान लैब रिपोर्ट से छेड़छाड़, एसओपी का उल्लंघन, बीयू और अस्पतालों को अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्रों की कमी सहित अन्य कारणों से निलंबित कर दिया गया था। जिसमें 50 लाख रुपये तक का जुर्माना और नुकसान की भरपाई होने तक योजना से निलंबित कर दिया गया।
ये भी पढ़ें- गुजरात सरकार का बोटिंग एक्टिविटी पर बड़ा फैसला, अनिवार्य हुआ ये काम
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