गुजरात में आम जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों और नकली दवा माफियाओं के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने शिकंजा कस दिया है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया की अध्यक्षता में गांधीनगर स्थित स्वर्णिम संकुल में दो अहम उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकें हुईं. बैठक में साफ निर्देश दिए गए कि मिलावट और फर्जीवाड़े के मामलों में 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.

50 दवा फर्मों पर गिरी गाज, नकली दवा गिरोह का भंडाफोड़

खाद्य एवं औषधि नियमन तंत्र (FDCA) की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि नियमों की अनदेखी करने वाली 50 दवा फर्मों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं, जबकि 2 निर्माण इकाइयों को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया गया है. कार्रवाई के दौरान लखनऊ से गुजरात तक फैले नकली 'Nicardia Retard 10' दवाओं के नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है. इस मामले में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच में केस दर्ज कराया गया है.

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93 लाख रुपये का संदिग्ध खाद्य सामान जब्त

श्रावण मास के त्योहारों को देखते हुए राज्यभर में सघन चेकिंग अभियान चलाया गया. इस दौरान खाद्य तेल, घी, दूध और मसालों जैसी 42,988 किलोग्राम संदिग्ध सामग्री जब्त की गई, जिसकी कुल कीमत 93 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है. नियमों का उल्लंघन करने पर 38 घटिया रेस्तरां के लाइसेंस भी निरस्त किए गए हैं.

श्रमिकों की टीबी स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर

दूसरी समीक्षा बैठक में 'द्वितीय स्वास्थ्य परिषद' की 26 मुख्य सिफारिशों को जमीन पर उतारने की रणनीति तय की गई. औद्योगिक व निर्माण स्थलों पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए विशेष टीबी स्क्रीनिंग कैंप लगाए जाएंगे और मरीजों को पोषण सहायता दी जाएगी. इसके अलावा, बाढ़ प्रभावित और दूरदराज के तटीय इलाकों के लिए विशेष हेल्थ रेफरल प्रोटोकॉल बनेगा. साथ ही, PHC और CHC के जरिए गर्भवती महिलाओं की 100% ट्रैकिंग और टीकाकरण सुनिश्चित किया जाएगा.

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स्वास्थ्य मंत्री ने जनता से अपील की है कि गर्भावस्था या किसी भी गंभीर बीमारी के वक्त झाड़-फूंक या अंधविश्वास में समय गंवाने के बजाय मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं.

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