गुजरात में चांदीपुरा वायरस का जानलेवा प्रकोप लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है. हिम्मतनगर और गोधरा में इस वायरस के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. ​हाल ही में सामने आए ताजा मामलों में हिम्मतनगर और गोधरा में बच्चों की संदिग्ध मौत ने प्रशासन को पूरी तरह से अलर्ट मोड पर ला दिया है. गोधरा के मणिपुर में 1 साल के बच्चे की अचानक तबीयत खराब होने पर उसे गोधरा सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे अहमदाबाद सिविल अस्पताल रेफर किया गया था, लेकिन रास्ते में ही बच्चे ने दम तोड़ दिया.

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​मौतों का आंकड़ा पहुंचा 10 के पार

​राज्य में संदिग्ध चांदीपुरा वायरस से अब तक दम तोड़ने वाले बच्चों का कुल आंकड़ा बढ़कर 10 तक पहुंच गया है. हालांकि, लैब रिपोर्ट आने के बाद ही इसकी पुख्ता सच्चाई सामने आएगी. हिम्मतनगर सिविल अस्पताल में अब तक संदिग्ध चांदीपुरा वायरस के लक्षणों वाले 9 बच्चों को भर्ती कराया जा चुका है. इनमें से 6 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 बच्चों की हालत गंभीर और 1 बच्चे की स्थिति स्थिर बनी हुई है. जबकि गोधरा में भी इस खतरनाक वायरस के कारण 4 बच्चों की मौत हो चुकी है. ​गोधरा के विजोल और जीतपुरा गांव के दो बच्चों की जांच में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि भी हो चुकी है.

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​इस जानलेवा प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में ​डोर-टू-डोर हेल्थ सर्वे शुरू कर दिया है. ​बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग और निगरानी अभियान तेज कर दिया है. ​संक्रमित और संदिग्ध बच्चों के संपर्क में आए लोगों की भी गहनता से जांच की जा रही है. चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंड फ्लाई (रेतीली मक्खी) के काटने से फैलता है और यह 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है.

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चांदीपुरा वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते इस मामले में सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री ने गांधीनगर में तमाम अधिकारियों के साथ एक बैठक कर चांदीपुरा वायरस पर लगाम लगाने के लिए रणनीति पर विचार विमर्श किया है.

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