दिल्ली की कथित एक्साइज पॉलिसी मामले में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित अन्य आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को पत्र लिखकर न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की पीठ से मामले को हटाने और किसी 'निष्पक्ष' पीठ को सौंपने की मांग की है. इसी बीच हाई कोर्ट के समन को लेकर दिल्ली की पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और समन को चुनौती दी है.

केजरीवाल को ना मंजूर ये जज…


AAP ने बुधवार (11 मार्च) को जारी बयान में दावा किया कि आरोपियों को जस्टिस शर्मा की सुनवाई से 'फैसले को लेकर आशंका' है कि मामला निष्पक्षता और तटस्थता के साथ नहीं सुना जाएगा. यह विवाद उस समय बढ़ा जब 9 मार्च को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की एकल पीठ ने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए केजरीवाल समेत 22 आरोपियों को नोटिस जारी किया और निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाते हुए सीबीआई जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश पर भी विराम लगा दिया.

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कौन हैं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा?


केजरीवाल की चिट्ठी के बीच जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा का बैकग्राउंड चर्चा में है. डॉ. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में बीए (ऑनर्स) किया, जहां उन्हें वर्ष की सर्वश्रेष्ठ सर्वांगीण छात्रा चुना गया. 1991 में एलएलबी और 2004 में एलएलएम (LLM) पूरी की. इसके अलावा मार्केटिंग मैनेजमेंट, विज्ञापन और जनसंपर्क में डिप्लोमा भी हासिल है. 2025 में उन्होंने न्यायिक शिक्षा पर तुलनात्मक शोध के लिए पीएचडी प्राप्त की.

24 साल की उम्र में बनीं मजिस्ट्रेट


न्यायिक करियर में उन्होंने कम उम्र में उपलब्धियां हासिल कीं, वो 24 साल की उम्र में मजिस्ट्रेट बनीं और 35 साल में सत्र न्यायाधीश के पद पर पहुंची. दिल्ली की विभिन्न अदालतों में विशेष न्यायाधीश (CBI), परिवार न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के विशेष न्यायालयों की जिम्मेदारी संभाली. नवंबर 2019 में उत्तर जिला की प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनीं, मार्च 2022 में राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) रहीं. 28 मार्च 2022 को दिल्ली हाई कोर्ट की स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुईं.

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