दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल द्वारा लगाए गए पक्षपात के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. केजरीवाल ने शराब नीति मामले में सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से जस्टिस शर्मा को हटाने की मांग की थी. इस पर जज ने साफ कहा कि न्यायाधीश किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका किसी खास विचारधारा से कोई जुड़ाव नहीं है और कोर्ट केवल तथ्यों के आधार पर फैसले लेता है. जस्टिस शर्मा ने कहा कि एक जज के रूप में कानून से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होना कोई असामान्य बात नहीं है और इसे वैचारिक पक्षपात का संकेत नहीं माना जा सकता.
बच्चों के पेशे और हितों का टकराव
केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि जस्टिस शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में हैं, इसलिए हितों के टकराव का मामला बन सकता है. इसका जवाब देते हुए जज ने कहा कि उनके बच्चों का शराब नीति मामले से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने तर्क दिया कि न्यायाधीशों के बच्चों को वकालत करने से रोकना उनके मौलिक अधिकारों का हनन होगा. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी नेता के परिवार के लोग राजनीति में आ सकते हैं, तो जज के बच्चे कानून के पेशे में क्यों नहीं जा सकते. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं दे पाया जिससे यह साबित हो कि उनके परिजनों की प्रैक्टिस का असर इस केस पर पड़ रहा है.
यह भी पढ़ें: Kal Ka Mausam: अगले 72 घंटे सावधान! 9 राज्यों में आंधी और बारिश का अलर्ट; जानिए- आपके शहर में कैसा रहेगा मौसम
राजनेताओं के बयानों पर कोर्ट का रुख
केजरीवाल ने अपनी याचिका में गृह मंत्री अमित शाह के एक सार्वजनिक बयान का भी हवाला दिया था. इस पर जस्टिस शर्मा ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी राजनेता द्वारा सार्वजनिक रूप से क्या कहा जाता है, इस पर अदालत का कोई नियंत्रण नहीं है. केवल प्रतिकूल फैसले की आशंका के आधार पर किसी जज को केस छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. जज ने इसे एक जटिल स्थिति बताते हुए कहा कि अगर वह इस मामले से हटती हैं तो यह संदेश जाएगा कि वह दबाव में पीछे हट गईं. उन्होंने साफ किया कि न्यायपालिका को देश और दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती.
कर्तव्य से पीछे हटना समर्पण जैसा
जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले से अलग होना उनके लिए एक आसान रास्ता होता, लेकिन ऐसा करना अपने कर्तव्य से मुंह मोड़ने जैसा होता. उन्होंने कहा कि कोर्ट की कार्यवाही को मीडिया के नैरेटिव से जोड़ना और चरित्र हनन की कोशिश करना गलत है. यह याचिका केवल कयासों और संदेह पर आधारित थी, जिसमें उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाए गए थे. जस्टिस शर्मा ने जोर देकर कहा कि अगर वह इस वक्त पीछे हटती हैं, तो यह इंसाफ नहीं बल्कि ‘जस्टिस का मैनेज होना’ कहलाएगा. इन टिप्पणियों के साथ उन्होंने खुद को केस से अलग करने से मना कर दिया.
संबंधित खबरें
इंटरनेट बंद..., CJP प्रोटेस्ट ने कैसे बढ़ाई ट्रेन पैसेंजर्स की टेंशन?
44 mins agoदिल्ली दंगे में ताहिर हुसैन दोषी करार, कोर्ट ने 7 आरोपियों को किया बरी
3 hrs agoदिल्ली के इन इलाकों में 11 अक्टूबर को गुल रहेगी बिजली, चेक करें अपना इलाका
3 hrs agoदिल्ली में किलेबंदी! 3000+ हिरासत में, CJP प्रोटेस्ट में आज क्या-क्या हुआ?
3 hrs agoCJP प्रोटेस्ट के बीच हिरासत में लिए गए कई वकील, CJI ने दिया दखल
3 hrs agoVideo: केजरीवाल को पुलिस ने हिरासत में लिया, जबरन उठाकर बस में बिठाया
4 hrs agoCJP प्रदर्शन से सेंट्रल दिल्ली में बढ़ी परेशानी, रोडब्लॉक से यातायात प्रभाव
4 hrs agoजंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस की वर्दी पर लगे ये छोटे कैमरे क्या हैं?
7 hrs agoदिल्ली में आज 30 सड़कें बंद, डायवर्ट रहेगा रूट; यहां पढ़ें ट्रैफिक एडवाइजरी
12 hrs agoदिल्ली मेट्रो पर बड़ा अपडेट, अब 57 नहीं 45 स्टेशन बंद; कर सकेंगे इंटरचेंज
21 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines